Monday, April 6, 2026
दिल चुरावे ना आवेला उनकागुल खिलावे ना आवेला उनका -: मनोज भावुक
10:22 PM
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दिल चुरावे ना आवेला उनका
गुल खिलावे ना आवेला उनका
बात के त लगा लेलें दिल से
दिल लगावे ना आवेला उनका
जान से जादा चाहेलें हमके
ई बतावे ना आवेला उनका
साध लागेला हमरो कि रूसीं
पर मनावे ना आवेला उनका
बाड़े गजबे छलक जालें कतहूं
गम छुपावे ना आवेला उनका
सब पे विश्वास कर लेलें भावुक
आजमावे ना आवेला उनका
ग़ज़ल
© मनोज भावुक
Thursday, March 19, 2026
चैती -: जाइब देवी के दुवरिय हो रामाहोत भोरहरिया
12:15 AM
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जाइब देवी के दुवरिय हो रामा
होत भोरहरिया
देवी दुवारे बाजे अनघ बधाइयां 3
अरे मईया झूले निमिया के डलिया हो रामा 2
होत भोरहरिया
जाइब देवी के दुवरिय हो रामा
बेला चमेली के, माला मगाइबे 3
सांगवा में नरियर चुनरिया हो रामा 2
होत भोरहरिया
जाइब देवी के दुवरिय हो रामा
हिय बसे मोरे मैया के सुरतिया 3
दिहे दरश मोरी मयरिया हो रामा 2
होत भोरहरिया
जाइब देवी के दुवरिय हो रामा
सुनीला अरज बाटे जबले जिनिगिया
पूजबे चरन बन पूजरिया हो रामा
होत भोरहरिया
जाइब देवी के दुवरिय हो रामा
गीतकार श्री जितेंद्र सिंह जीत
गायन प विजय कपूर जी
Tuesday, March 17, 2026
चैती - नइहर से केहु ना आईले रामाबितले फगुनवा मैथली ठाकुर
6:55 AM
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नइहर से केहु ना आईले रामा
बितले फगुनवा
बाबा मोरा रहते त नौवां के पठावते
साड़ी संग चुडिया सेनुरा हो रामा
बितले फगुनवा
नैहर से केहु ना आईले रामा........
अम्मा मोरा रहती भैया के पठवती
भौजी के कठिन करेजा
बितले फगुनवा
नइहर से केहु ना आईले रामा
Saturday, March 7, 2026
चढ़ते फागुन के हों महीना देवरा पीछे पड़ल कमीना
7:19 AM
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चढ़ते फागुन के हों महीना
देवरा पीछे पड़ल कमीना
बैरी भइल बा हो फगुनवा न
अब घर आजा सजनवा न
भइल बा दिवाना मुअना हमरी चाल पर
कइले बा आंख हमरी गोरे गोरे गाल पर
ओकर कइसे करीं भरोसा
अचके में कर दीही धोखा
बढ़ल बाटे ओकर मनवा न
अब घर आजा सजनवा न
अगहीं से देता ऊ त हमरा के धमकी
तोही से खेलब रंग भउजी हो अबकी
करबू केतनो तूं हूं चतुराई
अबकी बृथा दांव न जाई
रंगब तोहरो सारा बदनवा न
अब घर आजा सजनवा न
करतानी फोन हम अइह जरुर जी
ना त 'सागर"देवरा करी मजबूर जी
गन्दी एकर नीयत बाटे
अब त दारू पीयत बाटे
कर दीही कवनो घटनवा न
कि अब घर आजा सजनवा न
फगुआ में कहां अंझुरइलें हो बचवा काहें नाहीं अइलें
7:17 AM
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फगुआ के मस्ती सब झूमत औ गावत बा
लेके गुलाल रंग अंग अंग सब लगावत बा
"सागर सनेही"बचवा अइलें ना घर हमरो
बहे अंखियां से लोर याद माई के सतावत बा
फगुआ में कहां अंझुरइलें हो
बचवा काहें नाहीं अइलें
ममता के कइसे भुलि गइलें हो
बचवा काहें नाहीं अइलें
सोचलीं कि अइहं त उबटन लगाइब
दुःखवा दरिद्र उनके दूर हम भगाइब
ललसा अधूरा रह गइलें हो
बचवा काहें नाहीं अइलें
पुआ, पकवान खूब निक हम बनइतीं
बबुआ के हाथे अपनी हमहूं खियइतीं
सपना पर पानी फिर गइलें हो
बचवा काहें नाहीं अइलें
सागर सनेही कुछ कहलो ना जात बा
भीतर भीतर मन मोरा अकुलात बा
केवनी माया में परि गइलें हो
बचवा काहें नाहीं अइलें
अचके में नेहिया सनेहिया भुलाईबचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई
7:13 AM
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अचके में नेहिया सनेहिया भुलाई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई
दिहलू जनमवा माई दुधवा पियवलू
अपने भले ना खइलू हमके खियवलू
हीरा, मोती, लाल कहि अब के बोलाई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई
अंगूरी पकड़ि हमार चले तूं सिखवलू
दुनिया समाज के तूं रहिया देखवलू
दुखवा तूं दूर कइलू छाती से लगाई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई
भुखलू जिउतिया छठ कइलू तूं पूजा
बचवन के खुशी मंगलू कुछ ना दूजा
नजर उतारी के अब मरिचा जराई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई
सब कुछ बाटे माई लागता अधूरा
तोहरी कमी के माई के करी पूरा
सागर सनेही के बुद्धिया भुलाई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई
कइसे् लें आईं तोहरा के हार धनिया अब्बो नथुनी के बाकी उधार धनिया
6:43 AM
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कहली पत्नी पति से भये पांच साल किनले नथुनी
अब हार ले आव हे संइया बहुत दिन कुछ ना कहनी
कब्बो बाढ़ त कब्बो सूखा तोहरो बहाना खूब सुननी
"सागर"स्नेह नेह में तोहरी कबहूं कुछ हम ना मंगनी
कइसे् लें आईं तोहरा के हार धनिया
अब्बो नथुनी के बाकी उधार धनिया
धीरे धीरे पांच साल बाटे नियराइल
नथुनी के पइसा ना अबले दियाइल
लाजे जांयी ना हमहूं बाजार धनिया
कइसे लें आईं तोहरा के हार धनिया
एक बात कहीं हम मान मोरी रानी
सेनुरा सुहाग के ह असली निशानी
हम त हयीं सेनुरवा तोहार धनिया
कइसे लें आईं तोहरा के हार धनिया
"सागर सनेही" हम करतानी वादा
येह साल मेहनत करब हम ज्यादा
देके पहिला उधार लेबें हार धनिया
कइसे लें आईं तोहरा के हार धनिया
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