चल चली माई कामख्या स्थानवा ए बलमु
पूरा करिहें अरमानवा बलमु
सुनी न की मैया हमार हई बड़ा दानी,
भक्तन के लाज रखेली महारानी
मैया के चढ़ावल जाई नरियर चुनरिया ए बलमु
पूरा करिहें अरमानवा बलमु....…..
निर्धन के धन देली कोढ़ीयन के तनवा
सेवक बझीनियन के दे दे ली लालनवा
रातभर जागल जाई माई के सरनवा ए बालमु
पूरा करिहें अरमानवा बलमु...........
ग़ाज़ीपुर से तनिक दूरी माई के बा धमवा
मन मे विचार बाटे आई हम सरनवा
कुश तिवारी गईहै माई के भजनवा ए बलमु
पूरा करिहें अरमानवा बलमु
गीतकार -: कुश तिवारी







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