My Parents Shree Jai Prakash Tiwari Kanchan Tiwari

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Lav Tiwari and Kush Tiwari Live Performance at Chhat Mahotsav in Noida

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Me and Noida MLA Smt Vimla Batham

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Lav Tiwari and Kush Tiwari on Mahuaa Plus

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Big Brother Ravi Pratap Singh

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Me Ravinder Goel and Chiranjeet Sir

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Tuesday, January 7, 2025

गुरु वंदना- गुरु को न पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या –श्री फणिभूषण चौधरी

                                                     गुरु को न पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या २

धन दौलत तू पा भी लिया गर, चैन नहीं पाया तो क्या
गुरु को ना पहचान............. २

बाहर से आडंबर कुछ है ,भीतर रूप न निखारा है २
गुरु गुरु में सीस गुरु ने, गुरु बनने का झगड़ा है १
ऐसे गुरु २ भला बोलो क्या शिष्य को राह दिखाएगा
गुरु को ना पहचान सके...............

कहलाने को, भक्त बहुत है, लेकिन खोटा धंधा है २
माया ऐसे घेर लिया है रहते आंख भी अंधा है १
ऐसे भक्तो २ को प्रभु का दर्शन, कहो कैसे हो पाएगा
गुरु को ना पहचान सके...............२

डाल पकड़कर झूल रहा है, दुख कहा निवारण है २
जगत गुरु को भूल ही जाना, सभी दुखो का कारण है
सोच समझ कर २ गुरु करो तुम ,नही तो धोखा खाएगा
गुरु को ना पहचान सके...............२

जो करना, वो खुद ही करना, ना कहना नाइंसाफी है २
भजन में शब्द नही है काफी ,भाव का होना काफी है
गाया नही २ गुरु का महिमा राग रसीला गाया क्या
गुरु को ना पहचान सके...............२

गुरु को न पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या २
धन दौलत तू पा भी लिया गर २ चैन नहीं पाया तो क्या
गुरु को ना पहचान............. २
जग जाना तो जाना........ ३

तर्ज – कसमें वादे प्यार वफा सब..........
गीतकार –श्री फणिभूषण चौधरी
गायक – धीरजकांत



मै होश में था तो फिर उस पे मर गया कैसे - कलाम चांदपुरी

          मै होश में था तो फिर उस पे मर गया कैसे

ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था

कुछ उसके दिल में लगावट जरुर थी वरना-३
वो मेरा हाथ वो मेरा हाथ
वो मेरा हाथ दबा कर गुजर गया कैसे- 2
ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था


जरुर उसकी तवज्जो की रहबरी होगी-३
नशे में था तो में अपने ही घर गया कैसे-२
ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था

जिसे भुलाए कई साल हो गए कामिल-३
में आज उसकी गली से गुजर गया कैसे-२
ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था तो फिर उसपे मर गया कैसे


गायक कलाकार- जनाब मेंहदी हसन साहब
रचना- कलाम चांदपुरी


मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया -: चंदन दास

                                                            मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया 

तब उन्हे मुझसे मिलने की फ़ुर्सत मिली

हाल-ए-दिल पूछने जब वो घर से चले
हाल-ए-दिल पूछने जब वो घर से चले 
रास्ते मे उन्हे मेरी मैयत मिली
मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया

वो जफ़ा कर के भी क़ाबिल-ए-कद्र है 
मुझको मेरी वफ़ा का सिला ये मिला
जीते जी मै तो रुसवा रहा उम्र भर
जीते जी मै तो रुसवा रहा उम्र भर 
बाद मरने की भी मुझको तोहमत मिली
मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया

मेरी मैयत को दीवाने की लाश है 
ऐसा कह कर शहर मे घुमाया गया
इस तरह उनको शोहरत खुदा की क़सम
इस तरह उनको शोहरत खुदा की क़सम 
मेरी रुसवाईयों की बदौलत मिली
मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया

एक ही शाख पर साज़ दो गुल खिले 
चाल किस्मत की लेकिन ज़रा देखिए
एक गुल क़ब्र पर मेरी शर्मिंदा है
एक गुल क़ब्र पर मेरी शर्मिंदा है 
एक को उनकी ज़ुल्फ़ों मे इज़्ज़त मिली

मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया 
तब उन्हे मुझसे मिलने की फ़ुर्सत मिली
हाल-ए-दिल पूछने जब वो घर से चले 
रास्ते म उन्हे मेरी मैयत मिली
मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया



चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा

                                                           चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा

चैत शुभ दिनवा................................-2

केकर हउव राम,  केकर हउव लक्ष्मण -2
केकर हउव  भरत भुवलवा हो रामा
चैत शुभ दिनवा................................ -2
चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा
चैत शुभ दिनवा................................-2


कौशल्या के राम, सुमित्रा  के लक्ष्मण -2
कैकेयी के भरत भुवलवा हो रामा
चैत शुभ दिनवा................................ -2
चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा

चैत शुभ दिनवा................................-2

के हो लुटावेला अन धन सोनवा-2
के हो लुटावेला कर कँगनवा हो रामा 
चैत शुभ दिनवा.।
चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा

चैत शुभ दिनवा................................-2


राजा लुटावेलन अन धन सोनवा-2
रानी लुटावेली कर कँगनवा हो रामा 
चैत शुभ दिनवा.।
चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा

चैत शुभ दिनवा................................-2


मारुत के पूत हनुमान हो शुभ आरती उतारी - श्री विजय शंकर त्रिपाठी जी

                                                       मारुत के पूत हनुमान हो शुभ आरती उतारी।

मारुत के पूत हनुमान हो शुभ आरती उतारी।।

शिव के सुवन माता अंजनी के नंन्दन
कृपा से तोहरे भव बंधन
रघुबर के दूत हनुमान हो- 2
मारुत के पूत हनुमान हो शुभ आरती उतारी-2

दरस के फल होला मंगलकारी
तोहरे पर रीझे ले अवध बिहारी
बल बुद्धि विद्या के खान हो- 2
मारुत के पूत हनुमान हो शुभ आरती उतारी-2

मथवा लगाई टीका रोरिया चनन के
अति प्रिय प्रभु श्री सियाराम लखन के
गुण गाये जिनकर भगवान हो-2
मारुत के पूत हनुमान हो शुभ आरती उतारी-2

बाजे ला नगाड़ा घरी घंट जय जय के-2
चरन शरन राखी गुन द विजय के-2
करत रहे जयगान हो
शुभ आरती उतारी
मारुत के पूत हनुमान हो शुभ आरती उतारी


ये रचना हमारे बड़ी माता श्री मति निर्मला तिवारी के फूफा स्वर्गीय  द्वारा रचिय हनुमान बिनय बत्तीसी से लिया गया है। जिसे महान गायक श्री मनोज तिवारी के द्वारा गाया गया है और संगीत भोजपुरी महान संगीतकार स्वर्गीय श्री धनंजय मिश्रा द्वारा दी गयी है।
 




मुझे रास आ गया है अब तेरे दर पे सर झुकाना

                                                    मुझे रास आ गया है अब तेरे दर पे सर झुकाना ३

तुझे मिल गई पुजारन २ और मुझे मिल गया ठिकाना
ओं प्रभु जी मुझे रास....................

मुझे कौन जानता था तेरी बंदगी से पहले २ २
तेरी याद ने बना दी ओ गिरधर तेरे भजन ने बना दी
मेरी जिंदगी बनाना
मुझे रास आ गया.............................

मुझे इसका गम नही है २ कि बदल गया ये ज़माना २
मेरी जिंदगी के मालिक कही तुम बदल ना जाना
मुझे रास आ..............

तेरी सावली सी सूरत, मेरे मन में बस गई है ओ गिरधर
मेरे सावरे कन्हैया २ मुझे और ना सतना २
मुझे रास आ......

मेरी आरजू यही है ,दम निकले तेरे दर पर
क्यों कि अभी सास चल रही ओ गिरधर
कही तुम चले ना जाना
मुझे रास आ..............

मुझे रस ........२
तुझे मिल.......२



शिव भजन -: महादेव शंकर, है जग है निराले

                                                                महादेव शंकर, है जग है निराले

बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले-२
मेरे मन के मंदिर में रहते है शिव जी
ये मेरे नयन उन्ही के शिवालय

महादेव शंकर, है जग है निराले
बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले-
मेरे मन के मंदिर में रहते है शिव जी
ये मेरे नयन उन्ही के शिवालय
महादेव........

बना लो उन्हें अपने जीवन की आशा
सदा दूर तुमसे रहेगी निराशा-२
बिना मांगे बरदान तुमको मिलेगा
समझते वो तो हर एक मन की भाषा
वो उनके है जो उनकों अपना बना ले
महादेव........

जिधर देखों शिव की है महिमा निराली
ये दाता है और सारी दुनिया शवाली-२
जो इस द्वार पे अपना विश्वास करले
तो पल भर में भर जायेगी झोळी खाली
उन्ही के अंधेरे उन्ही के उजाले
महादेव........

महादेव शंकर, है जग है निराले
बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले-२
मेरे मन के मंदिर में रहते है शिव जी
ये मेरे नयन उन्ही के शिवालय