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Lav Tiwari and Kush Tiwari Live Performance at Chhat Mahotsav in Noida

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Me and Noida MLA Smt Vimla Batham

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Lav Tiwari and Kush Tiwari on Mahuaa Plus

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Big Brother Ravi Pratap Singh

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Me Ravinder Goel and Chiranjeet Sir

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Tuesday, January 7, 2025

जब आँचल रात का लहराए-: राजेंद्र मेहता नीना मेहता

 जब आँचल रात का लहराए

और सारा आलम सो जाए

तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर
ताजमहल में आ जाना
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर,
ताजमहल में आ जाना
जब आँचल रात का लहराए।

यह ताजमहल ज़ो चाहत की
आँखों का सुनहेरा मोती है
हर रात जहाँ दो रूहों की
खामोशी ज़िंदा होती है
इस ताज के साए में आकर तुम
गीत वफ़ा का दोहराना
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर
ताजमहल में आ जाना
जब आँचल रात का लहराए।

तन्हाई है जागी-जागी सी
माहौल है सोया-सोया हुआ
जैसे के तुम्हारे ख्वाबों में
खुद ताजमहल हो खोया हुआ
हो, ताजमहल का ख्वाब तुम्ही
यह राज़ ना मैने पहचाना
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर
ताजमहल में आ जाना
जब आँचल रात का लहराए।

जो मौत मोहब्बत में आए
वो जान से बढ़कर प्यारी है
दो प्यार भरे दिल रोशन हैं
वो रात बहुत अंधियारी है
तुम रात के इस आँधियरे में
बस एक झलक दिखला जाना
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर
ताजमहल में आ जाना
जब आँचल रात का लहराए।

जब आँचल रात का लहराए
और सारा आलम सो जाए
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर
ताजमहल में आ जाना
तुम मुझसे मिलने, समा जलाकर
ताजमहल में आ जाना
तुम ताजमहल में आ जाना
जब आँचल रात को लहराए।






गुरु वंदना- गुरुवर तुम्हीं बता दो, किसकी शरण में जायें।

                                                        गुरुवर तुम्हीं बता दो, किसकी शरण में जायें।

किसकी चरण में गिरकर,अपनी व्यथा सुनायें॥

अज्ञान के तिमिर ने, चारों तरफ से घेरा।
क्या रात है प्रलय की, होगा नहीं सवेरा।
पथ और प्रकाश दो तो, चलने की शक्ति पायें।
गुरुवर तुम्ही बता.....

जीवन के देवता का, करते रहे निरादर।
कैसे करें समर्पित, जीवन की जीर्ण चादर।
यह पाप की गठरिया, क्या खोलकर दिखायें॥
गुरुवर तुम्ही बता दो किसकी...

माना कपूत हैं हम, क्या रुष्टï रह सकोगे।
मुस्कान प्यार अमृत, क्या दे नहीं सकोगे।
दाता तुम्हारे दर से, जायें तो किधर जाय।
गुरुवर तुम्ही बता दो...….

कभी काम क्रोध बनकर कभी माया लोभ बनकर
इन दानवों से कैसे अपना गला छुड़ाये ।।

गुरुवर तुम्ही बता दो
किसकी.........



गुरु वंदना- गुरुवर चरणों में दे दे ठिकाना मुझे - फणी भूषण जी चौधरी

                                                               गुरुवर चरणों में दे दे ठिकाना मुझे,

मैं भटकता हूँ राह दिखाना मुझे,
राह दिखाना मुझे.....
गुरुवर चरणो में दे दे ठिकाना मुझे।।

मैं तो पूजा से जप तप से अंजान हूँ,
मतलबी लोग से मैं परेशान हूँ,
कितना भरमाया है ये जमाना मुझे,
ये जमाना मुझे,
गुरुवर चरणो में, दे दे ठिकाना मुझे।।

तन कही और है मन कही और है,
सुख की चाहत की भारी यहाँ दौड़ है,
इस समंदर में अब ना बहाना मुझे,
ना बहाना मुझे.....
गुरुवर चरणो में दे दे ठिकाना मुझे।।

ये है काजल का घर बचके कैसे रहूं,
अपनी आवाज़ दिल की मैं किससे कहूं,
इस मुसीबत से तू ही बचाना मुझे।
हा बचना मुझे........
गुरुवर चरणो में दे दे ठिकाना मुझे।।

अब फणी के हृदय से ना तू दूर है,
अब तेरा फ़ैसला मुझको मंजूर है,
तुझको भूलूँ वो दिन ना दिखना मुझे,
ना दिखाना मुझे.....
गुरुवर चरणो में दे दे ठिकाना मुझे।।

गुरुवर चरणों में दे दे ठिकाना मुझे,
मैं भटकता हूँ राह दिखाना मुझे,
राह दिखाना मुझे.....
गुरुवर चरणो में दे दे ठिकाना मुझे।।

रचना- फणी भूषण जी चौधरी
गायक- श्री धरीज कान्त जी



गुरु वंदना- गुरु को न पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या –श्री फणिभूषण चौधरी

                                                     गुरु को न पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या २

धन दौलत तू पा भी लिया गर, चैन नहीं पाया तो क्या
गुरु को ना पहचान............. २

बाहर से आडंबर कुछ है ,भीतर रूप न निखारा है २
गुरु गुरु में सीस गुरु ने, गुरु बनने का झगड़ा है १
ऐसे गुरु २ भला बोलो क्या शिष्य को राह दिखाएगा
गुरु को ना पहचान सके...............

कहलाने को, भक्त बहुत है, लेकिन खोटा धंधा है २
माया ऐसे घेर लिया है रहते आंख भी अंधा है १
ऐसे भक्तो २ को प्रभु का दर्शन, कहो कैसे हो पाएगा
गुरु को ना पहचान सके...............२

डाल पकड़कर झूल रहा है, दुख कहा निवारण है २
जगत गुरु को भूल ही जाना, सभी दुखो का कारण है
सोच समझ कर २ गुरु करो तुम ,नही तो धोखा खाएगा
गुरु को ना पहचान सके...............२

जो करना, वो खुद ही करना, ना कहना नाइंसाफी है २
भजन में शब्द नही है काफी ,भाव का होना काफी है
गाया नही २ गुरु का महिमा राग रसीला गाया क्या
गुरु को ना पहचान सके...............२

गुरु को न पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या २
धन दौलत तू पा भी लिया गर २ चैन नहीं पाया तो क्या
गुरु को ना पहचान............. २
जग जाना तो जाना........ ३

तर्ज – कसमें वादे प्यार वफा सब..........
गीतकार –श्री फणिभूषण चौधरी
गायक – धीरजकांत



मै होश में था तो फिर उस पे मर गया कैसे - कलाम चांदपुरी

          मै होश में था तो फिर उस पे मर गया कैसे

ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था

कुछ उसके दिल में लगावट जरुर थी वरना-३
वो मेरा हाथ वो मेरा हाथ
वो मेरा हाथ दबा कर गुजर गया कैसे- 2
ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था


जरुर उसकी तवज्जो की रहबरी होगी-३
नशे में था तो में अपने ही घर गया कैसे-२
ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था

जिसे भुलाए कई साल हो गए कामिल-३
में आज उसकी गली से गुजर गया कैसे-२
ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था तो फिर उसपे मर गया कैसे


गायक कलाकार- जनाब मेंहदी हसन साहब
रचना- कलाम चांदपुरी


मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया -: चंदन दास

                                                            मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया 

तब उन्हे मुझसे मिलने की फ़ुर्सत मिली

हाल-ए-दिल पूछने जब वो घर से चले
हाल-ए-दिल पूछने जब वो घर से चले 
रास्ते मे उन्हे मेरी मैयत मिली
मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया

वो जफ़ा कर के भी क़ाबिल-ए-कद्र है 
मुझको मेरी वफ़ा का सिला ये मिला
जीते जी मै तो रुसवा रहा उम्र भर
जीते जी मै तो रुसवा रहा उम्र भर 
बाद मरने की भी मुझको तोहमत मिली
मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया

मेरी मैयत को दीवाने की लाश है 
ऐसा कह कर शहर मे घुमाया गया
इस तरह उनको शोहरत खुदा की क़सम
इस तरह उनको शोहरत खुदा की क़सम 
मेरी रुसवाईयों की बदौलत मिली
मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया

एक ही शाख पर साज़ दो गुल खिले 
चाल किस्मत की लेकिन ज़रा देखिए
एक गुल क़ब्र पर मेरी शर्मिंदा है
एक गुल क़ब्र पर मेरी शर्मिंदा है 
एक को उनकी ज़ुल्फ़ों मे इज़्ज़त मिली

मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया 
तब उन्हे मुझसे मिलने की फ़ुर्सत मिली
हाल-ए-दिल पूछने जब वो घर से चले 
रास्ते म उन्हे मेरी मैयत मिली
मैने मूह को कफ़न मे छुपा जब लिया



चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा

                                                           चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा

चैत शुभ दिनवा................................-2

केकर हउव राम,  केकर हउव लक्ष्मण -2
केकर हउव  भरत भुवलवा हो रामा
चैत शुभ दिनवा................................ -2
चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा
चैत शुभ दिनवा................................-2


कौशल्या के राम, सुमित्रा  के लक्ष्मण -2
कैकेयी के भरत भुवलवा हो रामा
चैत शुभ दिनवा................................ -2
चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा

चैत शुभ दिनवा................................-2

के हो लुटावेला अन धन सोनवा-2
के हो लुटावेला कर कँगनवा हो रामा 
चैत शुभ दिनवा.।
चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा

चैत शुभ दिनवा................................-2


राजा लुटावेलन अन धन सोनवा-2
रानी लुटावेली कर कँगनवा हो रामा 
चैत शुभ दिनवा.।
चारो भैया लिहल, जनमवा, हो रामा

चैत शुभ दिनवा................................-2