नइहर से केहु ना आईले रामा
बितले फगुनवा
बाबा मोरा रहते त नौवां के पठावते
साड़ी संग चुडिया सेनुरा हो रामा
बितले फगुनवा
नैहर से केहु ना आईले रामा........
अम्मा मोरा रहती भैया के पठवती
भौजी के कठिन करेजा
बितले फगुनवा
नइहर से केहु ना आईले रामा
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नइहर से केहु ना आईले रामा
बितले फगुनवा
बाबा मोरा रहते त नौवां के पठावते
साड़ी संग चुडिया सेनुरा हो रामा
बितले फगुनवा
नैहर से केहु ना आईले रामा........
अम्मा मोरा रहती भैया के पठवती
भौजी के कठिन करेजा
बितले फगुनवा
नइहर से केहु ना आईले रामा
रहिया निहारे पिपरवा के छाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
याद करा तुहु पहिले के बतिया
होलिया के दिनवा आ होलिया के रतिया
फिर से उहे पिरितिया जगाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
तोहरा बिना ई फगुनवा न सोहे
लाल गुलाबी अंगनवा न सोहे
केतनो पियाई चढ़त नइखे भाग रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
सुनिके पपीहरा और मोरवा के बोलिया
लागे करेजवा में जैसे कि गोलियां
नीक न लागे कागा के काव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
अमवा इमिलिया के सुंदर बगिया
ग उ वा के लोगवा के मीठी मीठी बोलिया
कहे जितेंद्र वचनिया निभाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
रहिया निहारे पिपरवा के छाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
रचना गायन-:
जितेंद्र पांडेय जी
अयोध्या उत्तर प्रदेश