My Parents Shree Jai Prakash Tiwari Kanchan Tiwari

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Lav Tiwari and Kush Tiwari Live Performance at Chhat Mahotsav in Noida

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Me and Noida MLA Smt Vimla Batham

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Lav Tiwari and Kush Tiwari on Mahuaa Plus

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Big Brother Ravi Pratap Singh

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Me Ravinder Goel and Chiranjeet Sir

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Tuesday, March 17, 2026

चैती - नइहर से केहु ना आईले रामाबितले फगुनवा मैथली ठाकुर

नइहर से केहु ना आईले रामा

बितले फगुनवा



बाबा मोरा रहते त नौवां के पठावते

साड़ी संग चुडिया सेनुरा हो रामा

बितले फगुनवा

नैहर से केहु ना आईले रामा........


अम्मा मोरा रहती भैया के पठवती

भौजी के कठिन करेजा

बितले फगुनवा

नइहर से केहु ना आईले रामा

Saturday, March 7, 2026

चढ़ते फागुन के हों महीना देवरा पीछे पड़ल कमीना

चढ़ते फागुन के हों महीना 
देवरा पीछे पड़ल कमीना 
बैरी भइल बा हो फगुनवा न
अब घर आजा सजनवा न 

भइल बा दिवाना मुअना हमरी चाल पर
कइले बा आंख हमरी गोरे गोरे  गाल पर 

ओकर कइसे करीं भरोसा 
अचके में कर दीही धोखा 
बढ़ल बाटे ओकर मनवा न
अब घर आजा सजनवा न 

अगहीं से देता ऊ त हमरा के धमकी
तोही से खेलब रंग भउजी हो अबकी 
करबू केतनो तूं हूं चतुराई 
अबकी बृथा दांव न जाई
रंगब तोहरो सारा बदनवा न
 अब घर आजा सजनवा न 

करतानी फोन हम अइह जरुर जी
ना त 'सागर"देवरा करी मजबूर जी
गन्दी एकर नीयत बाटे
अब त दारू पीयत बाटे 
कर दीही कवनो घटनवा न
कि अब घर आजा सजनवा न

फगुआ में कहां अंझुरइलें हो बचवा काहें नाहीं अइलें

फगुआ के मस्ती सब झूमत औ गावत बा
लेके गुलाल रंग अंग अंग सब  लगावत बा
"सागर सनेही"बचवा अइलें ना घर हमरो 
बहे अंखियां से लोर याद माई के सतावत बा

फगुआ में कहां अंझुरइलें हो 
बचवा काहें नाहीं अइलें 
ममता के कइसे भुलि गइलें हो
बचवा काहें नाहीं अइलें 

सोचलीं कि अइहं त उबटन लगाइब 
दुःखवा दरिद्र उनके दूर हम भगाइब
ललसा अधूरा रह गइलें हो
बचवा काहें नाहीं अइलें 

पुआ, पकवान खूब निक हम बनइतीं 
बबुआ के हाथे अपनी हमहूं खियइतीं 
सपना पर पानी फिर गइलें हो
बचवा काहें नाहीं अइलें 

सागर सनेही कुछ कहलो ना जात बा
भीतर भीतर मन मोरा अकुलात बा
केवनी माया में परि गइलें हो
बचवा काहें नाहीं अइलें

अचके में नेहिया सनेहिया भुलाईबचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई

अचके में नेहिया सनेहिया भुलाई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई

दिहलू जनमवा माई दुधवा पियवलू 
अपने भले ना खइलू हमके खियवलू
हीरा, मोती, लाल कहि अब के बोलाई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई 

अंगूरी पकड़ि हमार चले तूं सिखवलू
दुनिया समाज के तूं रहिया देखवलू
दुखवा तूं दूर कइलू छाती से लगाई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई 

भुखलू जिउतिया छठ कइलू तूं पूजा 
बचवन के खुशी मंगलू कुछ ना दूजा 
नजर उतारी के अब मरिचा जराई 
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई 

सब कुछ बाटे माई लागता अधूरा 
तोहरी कमी के माई के करी पूरा
सागर सनेही के बुद्धिया भुलाई 
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई

कइसे् लें आईं तोहरा के हार धनिया अब्बो नथुनी के बाकी उधार धनिया

कहली पत्नी पति से भये पांच साल किनले नथुनी
अब हार ले आव हे संइया बहुत दिन कुछ ना कहनी
कब्बो बाढ़ त कब्बो सूखा तोहरो बहाना खूब सुननी
"सागर"स्नेह नेह में तोहरी कबहूं कुछ हम ना मंगनी

कइसे् लें आईं तोहरा के हार धनिया 
अब्बो नथुनी के बाकी उधार  धनिया 

धीरे धीरे पांच साल बाटे नियराइल
नथुनी के पइसा ना अबले दियाइल
लाजे जांयी ना हमहूं बाजार धनिया 
कइसे लें आईं तोहरा के हार धनिया 

एक बात कहीं हम मान मोरी रानी 
सेनुरा सुहाग के ह असली निशानी
हम त हयीं सेनुरवा तोहार  धनिया 
कइसे लें आईं तोहरा के हार धनिया 

"सागर सनेही" हम करतानी वादा 
येह साल मेहनत करब हम ज्यादा 
देके पहिला उधार लेबें हार धनिया 
कइसे लें आईं तोहरा के हार धनिया

गीतकर सागर स्नेही जी

दुनिया के रीति नीति गजबे निराली बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली

दुनिया के रीति नीति गजबे निराली 
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली 

अपने ना आवे पिया भेजें ना नाई
अचके में होखे लागे घर से विदाई 
नइहर के लोग संगे, नाहीं ससुराली 
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली 

बांस के डोली बाटे ललका ओहरवा 
घर ही के लोग बाग बनेले कहंरवा
पिया के नगरिया चलेले हाली हाली 
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली 

दान, दहेज में भी कुछ ना दियाता 
गुन,अवगुनवा के गठरी भर जाता 
"सागर सनेही"दूनों हाथ बाटे खाली 
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली

गीतकार सागर स्नेही जी

Tuesday, March 3, 2026

रहिया निहारे पिपरवा के छाव रेआजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे

रहिया निहारे पिपरवा के छाव रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


याद करा तुहु पहिले के बतिया

होलिया के दिनवा आ होलिया के रतिया

फिर से उहे पिरितिया जगाव रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


तोहरा बिना ई फगुनवा न सोहे

लाल गुलाबी अंगनवा न सोहे

केतनो पियाई चढ़त नइखे भाग रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


सुनिके पपीहरा और मोरवा के बोलिया

लागे करेजवा में जैसे कि गोलियां

नीक न लागे कागा के काव रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


अमवा इमिलिया के सुंदर बगिया

ग उ वा के लोगवा के मीठी मीठी बोलिया

कहे जितेंद्र वचनिया निभाव रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


रहिया निहारे पिपरवा के छाव रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


रचना गायन-:

जितेंद्र पांडेय जी 

अयोध्या उत्तर प्रदेश