दुनिया के रीति नीति गजबे निराली
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली
अपने ना आवे पिया भेजें ना नाई
अचके में होखे लागे घर से विदाई
नइहर के लोग संगे, नाहीं ससुराली
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली
बांस के डोली बाटे ललका ओहरवा
घर ही के लोग बाग बनेले कहंरवा
पिया के नगरिया चलेले हाली हाली
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली
दान, दहेज में भी कुछ ना दियाता
गुन,अवगुनवा के गठरी भर जाता
"सागर सनेही"दूनों हाथ बाटे खाली
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली
गीतकार सागर स्नेही जी







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