Saturday, March 7, 2026

चढ़ते फागुन के हों महीना देवरा पीछे पड़ल कमीना

चढ़ते फागुन के हों महीना 
देवरा पीछे पड़ल कमीना 
बैरी भइल बा हो फगुनवा न
अब घर आजा सजनवा न 

भइल बा दिवाना मुअना हमरी चाल पर
कइले बा आंख हमरी गोरे गोरे  गाल पर 

ओकर कइसे करीं भरोसा 
अचके में कर दीही धोखा 
बढ़ल बाटे ओकर मनवा न
अब घर आजा सजनवा न 

अगहीं से देता ऊ त हमरा के धमकी
तोही से खेलब रंग भउजी हो अबकी 
करबू केतनो तूं हूं चतुराई 
अबकी बृथा दांव न जाई
रंगब तोहरो सारा बदनवा न
 अब घर आजा सजनवा न 

करतानी फोन हम अइह जरुर जी
ना त 'सागर"देवरा करी मजबूर जी
गन्दी एकर नीयत बाटे
अब त दारू पीयत बाटे 
कर दीही कवनो घटनवा न
कि अब घर आजा सजनवा न

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