अचके में नेहिया सनेहिया भुलाई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई
दिहलू जनमवा माई दुधवा पियवलू
अपने भले ना खइलू हमके खियवलू
हीरा, मोती, लाल कहि अब के बोलाई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई
अंगूरी पकड़ि हमार चले तूं सिखवलू
दुनिया समाज के तूं रहिया देखवलू
दुखवा तूं दूर कइलू छाती से लगाई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई
भुखलू जिउतिया छठ कइलू तूं पूजा
बचवन के खुशी मंगलू कुछ ना दूजा
नजर उतारी के अब मरिचा जराई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई
सब कुछ बाटे माई लागता अधूरा
तोहरी कमी के माई के करी पूरा
सागर सनेही के बुद्धिया भुलाई
बचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई







0 comments:
Post a Comment