रहिया निहारे पिपरवा के छाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
याद करा तुहु पहिले के बतिया
होलिया के दिनवा आ होलिया के रतिया
फिर से उहे पिरितिया जगाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
तोहरा बिना ई फगुनवा न सोहे
लाल गुलाबी अंगनवा न सोहे
केतनो पियाई चढ़त नइखे भाग रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
सुनिके पपीहरा और मोरवा के बोलिया
लागे करेजवा में जैसे कि गोलियां
नीक न लागे कागा के काव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
अमवा इमिलिया के सुंदर बगिया
ग उ वा के लोगवा के मीठी मीठी बोलिया
कहे जितेंद्र वचनिया निभाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
रहिया निहारे पिपरवा के छाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
रचना गायन-:
जितेंद्र पांडेय जी
अयोध्या उत्तर प्रदेश







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