My Parents Shree Jai Prakash Tiwari Kanchan Tiwari

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Lav Tiwari and Kush Tiwari Live Performance at Chhat Mahotsav in Noida

If you want to show this vedio please click this image.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Me and Noida MLA Smt Vimla Batham

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Lav Tiwari and Kush Tiwari on Mahuaa Plus

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Big Brother Ravi Pratap Singh

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Me Ravinder Goel and Chiranjeet Sir

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Tuesday, November 19, 2013

Chamakte chand ko toota hua tara bana dala By Ghulam Ali

चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आवारगी ने मुझको आवारा बना डाला

बड़ा दिलकश, बड़ा रँगीन, है ये शहर कहते हैं
यहाँ पर हैं हज़ारों घर, घरों में लोग रहते हैं
मुझे इस शहर की गलियों का बंजारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला

मैं इस दुनिया को अक्सर देखकर हैरान होता हूँ
न मुझसे बन सका छोटा सा घर, दिन रात रोता हूँ
खुदाया तूने कैसे ये जहां सारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला

मेरे मालिक, मेरा दिल क्यूँ तड़पता है, सुलगता है
तेरी मर्ज़ी, तेरी मर्ज़ी पे किसका ज़ोर चलता है
किसी को गुल, किसी को तूने अंगारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला

यही आग़ाज़ था मेरा, यही अंजाम होना था
मुझे बरबाद होना था, मुझे नाकाम होना था
मेरी तक़दीर ने मुझको, तक़दीर का मारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला_____आनंद बख़्शी

गायक __गुलाम अली



Sunday, November 3, 2013

Hindi lyrics of devotional song Depawali manai Suhani

दीपावाली मनाई सुहानी (२)
मेरे साई के हाथो में जादू का पानी
दीपावाली...

दीपावाली... (२)
श्रद्धा का दीपक भक्ति की ज्योति (२)
सत्य प्रेम की जलती निशानी (२)
दीपावाली...
मेरे साई के हाथोमें जादू का पानी दीपवली
मेरे साई की अमृतवाणी (२)
मैं तो भाई रे साई की देवानी (२)
द्वारकामाई मैं वेद पुराण (२)
दीपावाली...

ॐ साई राम
Om Sai Ram




Youtube Link

Thursday, October 31, 2013

Jalao Diye par rahe dhyan itana. By Neeraj Gopal

जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना
अन्धेरा धरा पर कहीं रह न जाये |


नयी ज्योति के धर नये पंख झिलमिल,
उडे मर्त्य मिट्टी गगन स्वर्ग छू ले,
लगे रोशनी की झडी झूम ऐसी,
निशा की गली में तिमिर राह भूले,
खुले मुक्ति का वह किरण द्वार जगमग,
उषा जा न पाये, निशा आ ना पाये |


जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना
अन्धेरा धरा पर कहीं रह न जाये |


स्रजन है अधूरा अगर विश्व भर में,
कहीं भी किसी द्वार पर है उदासी,
मनुजता नहीं पूर्ण तब तक बनेगी,
कि जब तक लहू के लिए भूमि प्यासी,
चलेगा सदा नाश का खेल यूं ही,
भले ही दिवाली यहां रोज आये |


जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना
अन्धेरा धरा पर कहीं रह न जाये |


मगर दीप की दीप्ति से सिर्फ जग में,
नहीं मिट सका है धरा का अंधेरा,
उतर क्यों न आयें नखत सब नयन के,
नहीं कर सकेंगे ह्रदय में उजेरा,
कटेंगे तभी यह अंधरे घिरे अब,
स्वय धर मनुज दीप का रूप आये |


जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना
अन्धेरा धरा पर कहीं रह न जाये | ----गोपालदास "नीरज"


Monday, October 28, 2013

Var de vidavadini var de By Surykant Tripathi Nirala

वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
भारत में भर दे !

काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
जगमग जग कर दे !

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
नव पर, नव स्वर दे !

वर दे, वीणावादिनि वर दे।___सूर्यकांत त्रिपाठी निराला



Saturday, October 26, 2013

Log tut jate hai ek ghar banane me By Bashir Badr

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में

और जाम टूटेंगे इस शराब-ख़ाने में
मौसमों के आने में मौसमों के जाने में

हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं
उम्र बीत जाती है दिल को दिल बनाने में

फ़ाख़्ता की मजबूरी ये भी कह नहीं सकती
कौन साँप रहता है उसके आशियाने में

दूसरी कोई लड़की ज़िन्दगी में आयेगी
कितनी देर लगती है उसको भूल जाने में ___बशीर बद्र



Friday, October 25, 2013

Ab to mazahab koi aisa bhi chalaya jaye By Gopaldas Neeraj

अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए।
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए।

जिसकी ख़ुशबू से महक जाय पड़ोसी का भी घर
फूल इस क़िस्म का हर सिम्त खिलाया जाए।

आग बहती है यहाँ गंगा में, झेलम में भी
कोई बतलाए कहाँ जाके नहाया जाए।

प्यार का ख़ून हुआ क्यों ये समझने के लिए
हर अँधेरे को उजाले में बुलाया जाए।

मेरे दुख-दर्द का तुझ पर हो असर कुछ ऐसा
मैं रहूँ भूखा ,तो तुझसे भी न खाया जाए।

जिस्म दो होके भी दिल एक हों अपने ऐसे
मेरा आँसू तेरी पलकों से उठाया जाए।

गीत उन्मन है, ग़ज़ल चुप है, रूबाई है दुखी
ऐसे माहौल में ‘नीरज’ को बुलाया जाए। __गोपालदास नीरज



कुछ बातें नीरज जी के बारें में ___जन्म: 04 जनवरी 1924
उपनाम__ नीरज
जन्म स्थान__ पुरावली, इटावा, उत्तर प्रदेश, भारत
कुछ प्रमुख
कृतियाँ__ दर्द दिया है, प्राण गीत, आसावरी, गीत जो गाए नहीं, बादर बरस गयो, दो गीत, नदी किनारे, नीरज की गीतीकाएँ, नीरज की पाती, लहर पुकारे, मुक्तकी, गीत-अगीत, विभावरी, संघर्ष, अंतरध्वनी, बादलों से सलाम लेता हूँ, कुछ दोहे नीरज के कारवां गुजर गया
विविध____ 2007 में पद्म भूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित

Rato ke musafir ho adhero me rahoge By Bashir Badr

रातों के मुसाफ़िर हो , अँधेरों में रहोगे 
जुगनूँ की तरह दिन में जलोगे, न बुझोगे

सब लोग ये कहते हैं कि तुम लौट गये हो 
तुम साथ थे, तुम साथ हो, तुम साथ रहोगे 

क्या अनकही ग़ज़लों की किताबें हैं वो आँखें 
जब पढ़ नहीं सकते हो, तो क्या ख़ाक लिखोगे 

खुशबू की हवेली है मेरे दिल की ज़मीं पर 
वादा करो , इक रोज़ मेरे साथ चलोगे

दिल्ली हो कि लाहौर कोई फ़र्क नहीं है
सच बोल के हर शहर में ऐसे ही रहोगे ____बशीर बद्र