My Parents Shree Jai Prakash Tiwari Kanchan Tiwari

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Lav Tiwari and Kush Tiwari Live Performance at Chhat Mahotsav in Noida

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Me and Noida MLA Smt Vimla Batham

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Lav Tiwari and Kush Tiwari on Mahuaa Plus

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Big Brother Ravi Pratap Singh

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Me Ravinder Goel and Chiranjeet Sir

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Tuesday, January 7, 2025

ओ मईया तैने का ठानी मन में -: गीतकार -; रवीन्द्र जैन

                                                                 ओ मईया तैने का ठानी मन में,

राम-सिया भेज दइरी वन में -२
हाय री तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दइ री वन में -२

यधपि भरत तेरो ही जायो,
तेरी करनी देख लज्जायो,
अपनों पद तैने आप गँवायो
भरत की नजरन में,
राम-सिया भेज........
हठीली तैने .....

महल छोड़ वहाँ नहीं’ रे मड़ैया,
सिया सुकुमारी,संग दोउ भईया,
काहू वृक्ष तर भीजत होंगे, तीरो मेहन में,
राम-सिया भेज...........
दीवानी तैने का........
राम-सिया भेज ..........

कौशल्या की छिन गयी वाणी,
रोय ना सकी उर्मिला दीवानी,
कैकेयी तू बस एक ही रानी
रह गयी महलन में,
राम-सिया भेज.......
दीवानी तैने का.........
राम-सिया भेज......….

                                                           स्वर गीत व संगीत- रविन्द्र जैन
यह गीत भारत देश के सुप्रसिद्ध धारवाहिक रामायण से लिया गया है। जिसे रामानंद सागर जी ने बनाया था और इस धारवाहिक के लगभग सारे गीत को खुद रविन्द्र जैन ने लिखने के साथ गाया व संगीतबद्ध किया किया है।
जय प्रभु श्री राम।।



घर दुवार खेत बारी दीहल अलगाई केकरा में बाबू रहीहें केकरा माई -: गीतकार सुनील यादव युवा किसान

                                                           घर दुवार खेत बारी दीहल अलगाई केकरा में बाबू रहीहें केकरा माई-५

जर जर बढूउती आईल थाक गईल जांगर
चलल जाला राह नाही,काँपे दुनु टागर-२
बढूउती चली के हई अंगूरी धराई-२
केकरा में बाबू रहीहे केकरा माई-२

का होई खेत बारी, के जोती के बोई
थाकल शरीर हमसे,कौन काम होई-२
उठल न बइठल जाला, चलता दवाई-२
केकरा में बाबू रहीहें केकरा माई-२

अखियों से कमे लउके, कमे सुनाला
बिगड़े ला काम घर के, बहुते बुझाला-२
चले नाई चारा कौनो, केतनो छटपटाई-२
केकरा में बाबू रहीहें केकरा माई-२

पालन पोषण कइनी तोहके कोड़ अकामके
ई दिन देखतानी बढूउती में आके
 बहुते कम जिनगी बाटे, कैसे ई ओराई
केकरा में बाबू रहीहें केकरा माई-२

घर दुवार खेत बारी दीहल अलगाई
केकरा में बाबू रहीहें केकरा माई-५




गणेश वंदना - गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-२ -: गीतकार अजय त्रिपाठी

                                                             वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-४
घर मे पधारों मेरे घर मे पधारों-२
काटो सकल क्लेश जी मेरे घर मे पधारों
गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-२

एक दन्त दया वंत चार भुजा धारी
माथे सिंदुर शोभे मुस की सवारी
सर्व सिद्ध सर्वेश जी मेरे घर मे पधारों
गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-२

मोदक प्रिय मुद मंगल दाता
विद्या वारि धी बुद्धि विधाता
गणपति पुत्र उमेश जी मेरे घर मे पधारों
गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-२

शंकर सुवन भवानी नन्दन
चरण कमल पर सत सत बन्दन
रिद्धि सिद्धि के प्राणेश जी मेरे घर में पधारों

गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-२

पधारों ---
काटो सकल क्लेश जी मेरे घर मे पधारों
गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-२



होली गीत- गौरी संग लिए शिव शंकर खेलत फ़ाग-२ -; मनोज तिवारी

शिव शंकर खेलत फ़ाग-२
गौरी संग लिए शिव शंकर खेलत फ़ाग-२

केकर भींगे लाल चुनरियां-२ केकर भिंगेला श्रीपाग-२
गौरी संग लिए शिव शंकर खेलत फ़ाग-२
केकर भिंगेला श्रीपाग-२
गौरी संग लिए शिव शंकर खेलत फ़ाग-२
गौरी संग लिए शिव शंकर खेलत फ़ाग

गौरी के भिंगेला लाल चुनरिया, शिव के भिंगेला श्रीपाग-२
गौरी संग लिए शिव शंकर खेलत फ़ाग-२
शिव के भिंगेला श्रीपाग-२
गौरी संग लिए शिव शंकर खेलत फ़ाग-२

कहवा झुराबे लाल चुनरियां कहा झुरबो श्रीपाग
गौरी संग लिए शिव शंकर खेलत फ़ाग-२
कहवां झुराबे श्रीपाग-२
गौरी संग लिए शिव शंकर खेलत फ़ाग-२

काशी में झुराबे लाल चुनरियां, झारखंड श्रीपाग
गौरी संग लिए शिव शंकर खेलत फ़ाग-२
झारखंड श्रीपाग-२
गौरी संग लिए शिव शंकर खेलत फ़ाग-२



काहें लायो नथुनिया उधार बालमा ताना मारेला हमके सोनार बालमा -: विद्या सागर "सागर सनेही"

काहें लायो नथुनिया उधार बालमा
ताना मारेला हमके सोनार बालमा

नथुनी पहिनि हम गइलीं बजरिया
जइसे पड़ल मुअना के नजरिया
अंगुरी देखावे बार बार बालमा
काहें लायो नथुनिया उधार बालमा
ताना मारेला हमके सोनार बालमा

एक बात कहीं हम तोहसे सजनवा
अबला के आबरू, ह असली गहनवा
मान, मर्यादा ह सिंगार बालमा
काहें लायो नथुनिया उधार बालमा
ताना मारेला हमके सोनार बालमा

सागर सनेही संइया मान मोर बतिया
देई द उधार चाहे बेंचि द जजतिया
भलही घर में लागी केवाड़ बलमा
काहें लायो नथुनिया उधार बालमा
ताना मारेला हमके सोनार बालमा

रचना - विद्यासागर स्नेही



हमके लेले अइह गजरा बजरिया से -: रचना श्री विद्यासागर स्नेही जी

छुपके छुपाइके नजरिया से
हमके लेले अइह गजरा बजरिया से

गजरा ले आके पिया केश में लगइह
प्यार विश्वास के उमिरिया बढ़इह
बाजी प्रीत के गीत सेजरिया से
हमके लेले अइह गजरा बजरिया से

गजरा त ह पिया प्यार के निशानी
करिह ना कबहूँ तूं येसे बेइमानी
ना त गिर जइब हमरी नजरिया से
हमके लेले अइह गजरा बजरिया से

हमरा के हरदम दिलवा में रखिह
सागर सनेही से बाकी कुछ सीखिह
रहिह बन्हल तूं प्रेम की रसरिया से
हमके लेले अइह गजरा बजरिया से

रचना श्री विद्यासागर स्नेही जी



रोइ, रोइ करें बेटी फोन अपनी माई के बछिया तोहार अइली घर में कसाई के -: विद्या सागर "सागर सनेही"

रोइ, रोइ करें बेटी फोन अपनी माई के

बछिया तोहार अइली घर में कसाई के


भेजलू बनाके, सजाके बहू रानी

सासु, ननदिया बनवली नौकरानी

कहिके भिखारिन  मारें झोंटा झोटियाइके

बछिया तोहार अइली घर में कसाई के


माह  छगो बीतल माई अइले गवनवा

मुहंवा से बोलल नाहीं अबले सजनवा

मारेलं लाते, लबदा रोज खिसियाइके

बछिया तोहार अइली घर में कसाई के


डरे नाहीं आवे नीद सुन महतारी

हमरा बा शक कहियो दिहं जारी, मारी

जनवा बचाल माई हमके बोलवाइके

बछिया तोहार अइली घर में कसाई के


 कुछ नाहीं कहब भले आधा पेट खाइब

भउजी के छाड़ी,  पहिनी दिनवा बिताइब

सागर सनेही "माई रोकिल तबाही के

बछिया तोहार अइली घर में कसाई के