My Parents Shree Jai Prakash Tiwari Kanchan Tiwari

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Lav Tiwari and Kush Tiwari Live Performance at Chhat Mahotsav in Noida

If you want to show this vedio please click this image.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Me and Noida MLA Smt Vimla Batham

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Lav Tiwari and Kush Tiwari on Mahuaa Plus

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Big Brother Ravi Pratap Singh

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Me Ravinder Goel and Chiranjeet Sir

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Tuesday, August 12, 2025

बात बहुते रहे जे कहल ना गइल।कुछ त रउरो तरफ से पहल ना भइल।

बात बहुते रहे जे कहल ना गइल।
कुछ त रउरो तरफ से पहल ना भइल।

हास में लोर के, पीर में प्यार के
जीत के ना कथा नित मिलल हार के
मिटि गइल सब हरफ खत के' धइले धइल। 

जाड़ के राति ठिठुरलि रजाई बिना
जेठ सोचत ह बेना किनाई कि ना
अब त सावन परा जात फइले फइल। 

देश घर गाँव जनता के' सरकार के
काटि टुकड़ा करनिहार किरदार के
साफ कुरुता के' नीचे लभेरल मइल। 

ज्ञान के भौन से बेसुरा तान के
साथ में ढोल फाटल पिटत डॉन के
घोरि के पी गइल सब शराफत कइल।

हमारे बाद हाले ग़म सुनाने कौन आएगाहँसाने सब तो आयेगे रुलाने कौन आएगा.

हमारे बाद हाले ग़म सुनाने कौन आएगा
हँसाने सब तो आयेगे रुलाने कौन आएगा

बहारे फूल बरसाया करेगी हर बरस लेकिन
तुम्हारी राह में आँखे बिछाने कौन आएगा

मेरी आँखों मे जब आंसू न होंगे ए रात की रानी
तेरा जुडा सितारों से सजाने कौन आएगा

नजीर उठ जाएगा दुनिया से मुझको ग़म नही इसका
ग़म इसका है कि तेरा ग़म उठाने कौन आएगा

आजकल के नेता लोग के देखी राजनीति हो तिरंगा सोच ता आगे कइसे दिनवा बीती हो तिरंगा सोच ता

आजकल के नेता लोग के देखी राजनीति हो 
तिरंगा सोच ता आगे कइसे दिनवा बीती हो तिरंगा सोच ता

पार्टी जातिवाद वाला नारा लगवेल।
आवे जब वोट सबके पहड़ा पढ़ावेल।।
हो.....पहड़ा पढ़ावेल।।
बनल एकता में डाले नेता फुटनीति हो तिरंगा सोच त
आगे कइसे दिनवा बीती हो तिरंगा सोच ता
हो तिरंगा सोच ता

ओटवा से पहले सब शरीफे बुझाला।
पा जाले कुर्सी तब करेलन घोटाला।।
हो...करेलन घोटाला।।
आजकल के नेता लोग के यहे राजनीति हो तिरंगा सोच ता
आगे कइसे दिनवा बीती हो तिरंगा सोच ता
हो तिरंगा सोच ता

पार्टी ए क झंडा सब कर गाड़ी पर देखात बा।
धीरे धीरे सबही तिरंगा के भुलात बा
हो.....तिरंगा के भुलात बा
आगे कइसे दिनवा बीती हो तिरंगा सोच ता
हो तिरंगा सोच ता

लिखे ओमप्रकाश देखी के आवत रोवाई
लागता हमार कहियो देशवा लुटाई
अरे......देशवा लुटाई
दिन पर दिन बिगड़े देशवा के स्थिति हो
हो तिरंगा सोच ता
आगे कइसे दिनवा बीती हो तिरंगा सोच ता
हो तिरंगा सोच ता

संसार के लोगों से आशा ना किया करना,जब कोई न हो अपना, श्रीराम जपा करना

संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई न हो अपना, श्री राम जपा करना।
संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई न हो अपना, श्री राम जपा करना।
संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई न हो अपना, श्री राम जपा करना।

जीवन के समंदर में तूफ़ान भी आते हैं,
जो प्रभु के भरोसे हैं, प्रभु आप बचाते हैं,
वो खुद ही आएँगे, तुम नाम जपा करना,
तुम नाम जपा करना, श्री राम जपा करना,
संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई न हो अपना, श्री राम जपा करना।

दावा ना जमा लेना ये देश बेगाना है,
इस घर में तो प्राणी, वापिस नहीं आना है,
मेरे राम की किरपा से, तुम भजन किया करना,
तुम भजन किया करना, श्री राम जपा करना,
संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई न हो अपना, श्री राम जपा करना।

हे दास न रो दुःख से, प्रभु तुम से दूर नहीं,
भक्तों का दुखी होना, प्रभु को मंजूर नहीं,
आता है सदा उनको भक्तों पे दया करना,
भक्तों पे दया करना, श्री राम जपा करना,
संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई न हो अपना, श्री राम जपा करना।

संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई न हो अपना, श्री राम जपा करना।
संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई न हो अपना, श्री राम जपा करना।

Sunday, July 6, 2025

रामा रामा रटते रटते,बीती रे उमरिया

रामा रामा रटते रटते,
बीती रे उमरिया ।
रघुकुल नंदन कब आओगे,
भिलनी की डगरिया ॥

मैं शबरी भिलनी की जाई,
भजन भाव ना जानु रे ।
राम तेरे दर्शन के हित,
वन में जीवन पालूं रे ।
चरणकमल से निर्मल करदो,
दासी की झोपड़िया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥

रोज सवेरे वन में जाकर,
फल चुन चुन कर लाऊंगी ।
अपने प्रभु के सन्मुख रख के,
प्रेम से भोग लगाऊँगी ।
मीठे मीठे बेरों की मैं,
भर लाई छबरिया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥

श्याम सलोनी मोहिनी मूरत,
नैयनो बीच बसाऊंगी ।
सुबह शाम नित उठकर मै तो,
तेरा ध्यान लगाऊँगी ।
[Extra/Optional]
पद पंकज की रज धर मस्तक,
जीवन सफल बनाउंगी ।
अब क्या प्रभु जी भूल गए हो,
दासी की डगरिया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥

नाथ तेरे दर्शन की प्यासी,
मैं अबला इक नारी हूँ ।
दर्शन बिन दोऊ नैना तरसें,
सुनलो बहुत दुखारी हूँ ।
हरी रूप में दर्शन देदो,
डालो एक नजरिया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥

रामा रामा रटते रटते,
बीती रे उमरिया ।
रघुकुल नंदन कब आओगे,
भिलनी की डगरिया ॥

Thursday, May 29, 2025

राह रोकी न छेकी अब सोनार धनिया गीत :डॉ शशिकांत तिवारी

राह रोकी न छेकी अब सोनार धनिया 
हईल पहिरअ तू गरवा में हार धनिया 
 तोहरे नामे कह त क दी पूरा बाजार रनिया 2
 बाड़ू सोनावो  से महंग  हमार ...

रहे मजबूरी ओह बेर लाग गईल बाकी 
सोनरा के सीखा देले, रहली छोटकी काकी 
ज़ब पता चलल ,भईल जम के मार धनिया 
हई ल पहिरअ तू गरवा में हार धनिया
राह रोकी न  छेकी अब सोनार धनिया 

 हमरे से लेतबा उ कर्जा उधार हो 
 बन गईल बा दिन जानत बाटे जवार हो 2
 कहअत करधन गढ़ा दी आ मोटका हार धनिया
हई ल पहिरअ तू गरवा में हार धनिया
राह रोकी न छेकी अब सोनार धनिया 

गीत :डॉ शशिकांत तिवारी

Friday, May 2, 2025

इन्द्रधनुही के रंग में रंगल जिन्दगीकुछ अँजोरिया भरल, कुछ अन्हरिया भरल।-: श्री सुभाष पांडेय गोपालगंज बिहार

इन्द्रधनुही के रंग में रंगल जिन्दगी
कुछ अँजोरिया भरल, कुछ अन्हरिया भरल।
कबहुँ सुख के समुन्दर पखारे चरन
कबहुँ माथे प दुख के बदरिया ढरल।

कबहुँ अँजुरी भ' अमरित बिना श्रम मिले
कबहुँ चुटकी भ' चाहत छिंटा के गिरे
कबहुँ पौरुख के पाथर निशानी गड़ल
कबहुँ गतरे-गतर रोग आ के हिरे
जब ले पानी रहे त'ले पानी मिले
कबहुँ पनघट पहुँचि ना गगरिया भरल। 

देखि मुखड़ा सुघर काल्हि जे आ गइल
आजु दोसर भेंटाते छिटिक दूर बा। 
प्रीति के पाँव ठुमुकत दुआरे चलल
टूटि के सुख सपन अब भइल चूर बा
ताज सनमान के माथ सोहत रहे
चूक तनिका भइल त पगरिया गिरल।

सुनि अवाई सजावल गइल सब सड़क 
पग धरा ना परे बिछि गइल फूल बा
नाम पद रोब पदवी तनिक कम भइल
राह सँकरो में अनगिन भरल शूल बा
एक नजर का बदे लोग पागल रहे
आजु तरसत नजर ना नजरिया फिरल। 

भोर ललकी किरिन स्वागतम कहि गइलि
तन जरल दूपहर के दुसह घाम से
साँझि होते सुनाइल विदा शुभ विदा
सुति गइलि राति बिस्तर पर आराम से
सुर सधल ना सदा शुद्ध 'संगीत' के
कंठ में सुर विवादी पइसि के थिरल।

संगीत सुभाष