My Parents Shree Jai Prakash Tiwari Kanchan Tiwari

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Lav Tiwari and Kush Tiwari Live Performance at Chhat Mahotsav in Noida

If you want to show this vedio please click this image.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Me and Noida MLA Smt Vimla Batham

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Lav Tiwari and Kush Tiwari on Mahuaa Plus

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Big Brother Ravi Pratap Singh

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Me Ravinder Goel and Chiranjeet Sir

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Monday, October 7, 2013

Ranjish hi sahi, dil hi dukhanay kay liye aa by Mehdi Hassan


रंजिश ही सही, दिल को दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझको मनाने के लिए आ

पहले से मरासिम न सही, फिर भी कभी तो
रस्मों-रहे दुनिया ही निभाने के लिए आ

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है, तो ज़माने के लिए आ

इक उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिरिया से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझको रुलाने के लिए आ

अब तक दिल-ए-ख़ुशफ़हम को तुझ से हैं उम्मीदें
ये आखिरी शमएँ भी बुझाने के लिए आ____अहमद फ़राज़

गायक __मेहँदी हसन

Youtube Link



कुछ बातें अहमद फ़राज़ साहब के बारे में ___जन्म: 14 जनवरी 1931
निधन:__ 25 अगस्त 2008
उपनाम__ फ़राज़
जन्म स्थान____ नौशेरा, पाकिस्तान
कुछ प्रमुख
कृतियाँ____ ख़ानाबदोश,, ये मेरी ग़ज़लें वे मेरी नज़्में, ज़िंदगी ! ऐ ज़िंदगी !, दर्द आशोब
विविध___ अहमद फ़राज़ का मूल नाम सैयद अहमद शाह है। आप आधुनिक युग के उर्दू के सबसे उम्दा शायरों में गिने जाते हैं।

shayad main zindagi ki sahar le ke aa gaya

शायद मैं ज़िन्दगी की सहर ले के आ गया 
क़ातिल को आज अपने ही घर ले के आ गया 

ता-उम्र ढूंढता रहा मंज़िल मैं इश्क़ की 
अंजाम ये कि गर्दे-सफ़र ले के आ गया 

नश्तर है मेरे हाथ में , कांधों पे मैकदा
लो मैं इलाजे-दर्दे-जिगर ले के आ गया

"फ़ाकिर" सनमकदे में न आता मैं लौटकर
इक ज़ख्म भर गया था , इधर ले के आ गया ____सुदर्शन "फ़ाकिर"

सनमकदे __मंदिर
गर्दे सफ़र ___यात्रा की धूल




कुछ बातें सुदर्सन साहब के बारे में ___जन्म: 1935
निधन: __१८ फरवरी ‘०८
उपनाम__ फ़ाकिर
जन्म स्थान___ जालन्धर
कुछ प्रमुख
कृतियाँ____ पत्थर के ख़ुदा / सुदर्शन फ़ाकिर

Chandi jaisa rang hai tera sone jaise baal by Pankaj Udhas

चांदी जैसा रंग है तेरा , सोने जैसे बाल
एक तू ही धनवान है गोरी , बाकी सब कंगाल

जिस रस्ते से तू गुजरे , वो फूलों से भर जाये
तेरे पैर की कोमल आहट सोते भाग जगाये
जो पत्थर छु ले गोरी तू वो हीरा बन जाये
तू जिसको मिल जाये वो हो जाये मालामाल
एक तू ही धनवान है गोरी , बाकी सब कंगाल

जो बे -रंग हो उस पर क्या क्या रंग जमाते लोग
तू नादाँ न जाने कैसे रूप चुराते लोग
नज़रें भर भर देखें तुझको आते जाते लोग
छैल छबीली रानी थोडा घूंघट और निकाल
एक तू ही धनवान है गोरी , बाकी सब कंगाल

धनक घटा कलियाँ और तारे सब हैं तेरे रूप
धनक घटा कलियाँ और तारे सब हैं तेरा रूप
ग़ज़लें हों या गीत हों मेरे सब में तेरा रूप
यूँही चमकती रहे हमेशा तेरे हुस्न की धुप
तुझे नज़र न लगे किसी की जिए हजारों साल
एक तू ही धनवान है गोरी , बाकी सब कंगाल___अनजान

गायक __पंकज उधास





Sunday, October 6, 2013

Mulk Teri Barbadi Ke Aasar Nazar Aate Hai

मुल्क तेरी बर्बादी के आसार नज़र आते है ,
चोरों के संग पहरेदार नज़र आते है

ये अंधेरा कैसे मिटे , तू ही बता ऐ आसमाँ ,
रोशनी के दुश्मन चौकीदार नज़र आते है

हर गली में, हर सड़क पे ,मौन पड़ी है ज़िंदगी ,
हर जगह मरघट से हालात नज़र आते है

सुनता है आज कौन द्रौपदी की चीख़ को ,
हर जगह दुस्सासन सिपहसालार नज़र आते है

सत्ता से समझौता करके बिक गयी है लेखनी ,
ख़बरों को सिर्फ अब बाज़ार नज़र आते है

सच का साथ देना भी बन गया है जुर्म अब ,
सच्चे ही आज गुनाहगार नज़र आते है

मुल्क की हिफाज़त सौंपी है जिनके हाथों मे ,
वे ही हुकुमशाह आज गद्दार नज़र आते है

खंड खंड मे खंडित भारत रो रहा है ज़ोरों से ,
हर जाति , हर धर्म के, ठेकेदार नज़र आते है ____अनजान


koi deewana kehta hai koi pagal samajhta hai

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !! मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है ! ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !! मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है ! कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !! यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं ! जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !! समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता ! यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !! मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले ! जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !! भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा! हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा!! अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का! मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!! __कुमार विश्वास

chupke chupke raat din aansu bahana yaad hai By Gulam Ali

चुपके-चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है

तुझसे मिलते ही वो बेबाक हो जाना मेरा
और तेरा दाँतों में वो उँगली दबाना याद है

खेंच लेना वोह मेरा परदे का कोना दफ़तन
और दुपट्टे से तेरा वो मुँह छुपाना याद है

ग़ैर की नज़रों से बच कर सबकी मरज़ी के ख़िलाफ़
वो तेरा चोरी छिपे रातों को आना याद है

दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिए
वो तेरा कोठे पे नंगे पाँव आना याद है

चोरी-चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है____-हसरत मोहानी






ye daulat bhi le lo ye shohrat bhi le By Jagjit Singh

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन
वो काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

मुहल्ले की सबसे निशानी पुरानी
वो बुढ़िया जिसे बच्चे कहते थे नानी
वो नानी की बातों में परियों का डेरा
वो चहरे की झुरिर्यों में सदियों का फेरा
भुलाये नहीं भूल सकता है कोई
वो छोटी सी रातें वो लम्बी कहानी

कड़ी धूप में अपने घर से निकलना
वो चिड़िया वो बुलबुल वो तितली पकड़ना
वो गुड़िया की शादी में लड़ना झगड़ना
वो झूलों से गिरना वो गिर के सम्भलना
वो पीतल के छल्लों के प्यारे से तोहफ़े
वो टूटी हुई चूड़ियों की निशानी

कभी रेत के ऊँचे टीलों पे जाना
घरोंदे बनाना बना के मिटाना
वो मासूम चाहत की तस्वीर अपनी
वो ख़्वाबों खिलौनों की जागीर अपनी
न दुनिया का ग़म था न रिश्तों के बंधन
बड़ी खूबसूरत थी वो ज़िंदगानी _____सुदर्शन फ़ाकिर