My Parents Shree Jai Prakash Tiwari Kanchan Tiwari

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Lav Tiwari and Kush Tiwari Live Performance at Chhat Mahotsav in Noida

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Me and Noida MLA Smt Vimla Batham

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Lav Tiwari and Kush Tiwari on Mahuaa Plus

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Big Brother Ravi Pratap Singh

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Me Ravinder Goel and Chiranjeet Sir

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Sunday, October 20, 2013

Lah lah lahke la sagaro sivanava ki by Harvinder Singh Shibbu

लह लह लहके ला सागरो सिवनवा की (भोजपुरी लोक गीत)

लह लह लहके ला सागरो सिवनवा की -2
महके ला बाल कचनार
हो मितवा देख ल तू गाउवा हमार -2

चॅम चॅम चमके ला धानी रे चुनरिया की -2
हरियर भैअले घर द्वार
हो मितवा देख ल तू गाउवा हमार -2

पियर -२ भएले सागरो सिवनवा
छा गैइले बसंत के बाहर रे सजनावा
मान मोरा नाचे जैसे भोली रे चिरिया की-2
नेहिया के पखिया पसार .........................
हो मितवा..............................2

काबो सुख बाढ़ काबो आईले विपतियआ
हमनी खातिर बस आइल बा ससतिया
फुटत किरीनिया सिवनवा मे जाई-2
इहे बाटे जिये क आधार
हो मितवा..............................2

राम राम करके बिताई दिन रतीया
सबका से आपस मे लगाई ना पिरीतीया
दुश्मन के देखी ना त बैर भाव भूल के-2
सीमा पे लड़के तैयार
हो मितवा..............................2

लह लह लहके ला सागरो सिवनवा की -2
महके ला बाल कचनार
हो मितवा देख ल तू गाउवा हमार -2


गीत हरविंदर सिंह शिब्बू



He atithi mera swagat sweekar kijiye (Welcome Song)

स्वागत गीत...........................................

हे अतिथि मेरा स्वागत स्वीकार कीजिए-2
अपने गले मे प्रेम का -2  ये हार लीजिए
हे अतिथि...............................-2

हम आप के स्वागत मे पलके बिच्छाए है-2
भगवान बनके आप मेरे घर मे आए  है-2
कुछ भी नही भाव का उप हार लीजिए
हे अतिथि...............................-2


नही साग है बीदूर का, सेवरी का नही बेर-2
पंगु है कैसे आप ,का सत्कार हम करे-2
सब कुछ भुला के आप हमे प्यार दीजिए
हे अतिथि...............................-2


इस आगमन से आप के खुश है यहा के लोग-2
जॅन जॅन के मिलन का बना प्यारा मधुर सुयोग-2
ता उम्र इस मिलन का निर्वाह कीजिए..
हे अतिथि...............................-2


गीत-: ओम प्रकाश सिह,हरविंदर सिंह (शिब्बू) (1997)
      युवराजपुर  गाज़ीपुर


Wednesday, October 16, 2013

Na ji bhar ke dekha na kuch baat ki

न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की

कई साल से कुछ ख़बर ही नहीं
कहाँ दिन गुज़ारा कहाँ रात की

उजालों की परियाँ नहाने लगीं
नदी गुनगुनाई ख़यालात की

मैं चुप था तो चलती हवा रुक गई
ज़ुबाँ सब समझते हैं जज़्बात की

सितारों को शायद ख़बर ही नहीं
मुसाफ़िर ने जाने कहाँ रात की

मुक़द्दर मेरे चश्म-ए-पुर'अब का
बरसती हुई रात बरसात की ___बशीर बद्र

           
                   बशीर बद्र

Kal bhi man akela tha aaj bhi akela hai

कल भी मन अकेला था आज भी अकेला है
जाने मेरी किस्मत ने कैसा खेल खेला है

ढूंढते हो तुम खुशबू कागज़ी गुलाबों में
प्यार सिर्फ मिलता है आज कल किताबों में

रिश्ते नाते झूठे हैं स्वार्थ का झमेला है
ज़िन्दगी के मंडप में हर ख़ुशी कंवारी है

किस से मांगने जाएँ हर कोई भिखारी है
कहकहो की आँखों में आंसुओं का रेला है

जाने मेरी किस्मत ने कैसा खेल खेला है ___पंडित के राजदान

गायक___ मनहर उधास



Lab pe aati duaa banke tamanna meri


लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी
ज़िन्दगी शमअ की सूरत हो ख़ुदाया मेरी

दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा हो जाये
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये

हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन की ज़ीनत
जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत

ज़िन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब
इल्म की शमअ से हो मुझको मोहब्बत या रब

हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना
दर्द-मंदों से ज़इफ़ों से मोहब्बत करना

मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस राह पे चलाना मुझको___अल्लामा इकबाल 



Musafir ke raste badalate rahe

मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे
मुक़द्दर में चलना था चलते रहे 

मेरे रास्तों में उजाला रहा 
दिये उसकी आँखों के जलते रहे 

कोई फूल सा हाथ काँधें पे था 
मेरे पाँव शोलों पे चलते रहे 

सुना है उन्हें भी हवा लग गई
हवाओं के जो रूख बदलते रहे

वह क्या है जिसे हमने ठुकरा दिया
मगर उम्र भर हाथ मलते रहे

मोहब्बत अदावत वफ़ा बेरुखी
किराये के घर थे बदलते रहे

लिपट कर चरागों से वो सो गए
जो फूल पे करवट बदलते रहे ____बशीर बद्र




Wednesday, October 9, 2013

Zindgi Jab Bhi Teri Bazm Mein Lati Hain

Zindgi Jab Bhi Teri Bazm Mein Lati Hain....
जिन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती हैं हमे........

जिन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती हैं हमे
ये ज़मीं चाँद से बेहतर नजर आती हैं हमे

सुर्ख फूलों से महक उठती हैं दिल की राहें
दिन ढले यूँ तेरी आवाज बुलाती हैं हमे

याद तेरी कभी दस्तक, कभी सरगोशी से
रात के पिछले पहर रोज जगाती हैं हमे

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यों हैं
अब तो हर वक़्त यही बात सताती हैं हमे

गीतकार : शहरयार,
गायक : तलत अजीज
 संगीतकार : खय्याम

चित्रपट : उमराव जान –(1981)