Tuesday, January 7, 2025
हमके लेले अइह गजरा बजरिया से -: रचना श्री विद्यासागर स्नेही जी
रोइ, रोइ करें बेटी फोन अपनी माई के बछिया तोहार अइली घर में कसाई के -: विद्या सागर "सागर सनेही"
रोइ, रोइ करें बेटी फोन अपनी माई के
बछिया तोहार अइली घर में कसाई के
भेजलू बनाके, सजाके बहू रानी
सासु, ननदिया बनवली नौकरानी
कहिके भिखारिन मारें झोंटा झोटियाइके
बछिया तोहार अइली घर में कसाई के
माह छगो बीतल माई अइले गवनवा
मुहंवा से बोलल नाहीं अबले सजनवा
मारेलं लाते, लबदा रोज खिसियाइके
बछिया तोहार अइली घर में कसाई के
डरे नाहीं आवे नीद सुन महतारी
हमरा बा शक कहियो दिहं जारी, मारी
जनवा बचाल माई हमके बोलवाइके
बछिया तोहार अइली घर में कसाई के
कुछ नाहीं कहब भले आधा पेट खाइब
भउजी के छाड़ी, पहिनी दिनवा बिताइब
सागर सनेही "माई रोकिल तबाही के
बछिया तोहार अइली घर में कसाई के
आज होइ गइली बिटिया पराई न रे -: विद्या सागर "सागर सनेही"
सुसुकि सुसिक रोंवे दुअरा पे बाबुल
घरवा में रोवताड़ी माई न रे
आज होइ गइली बिटिया पराई न रे।
रहि रहि धधके करेजवा में अगिया
एक ही कोयल बिन सून भइली बगिया
ना जाने फिर कब चहकी चिरइया,
जाने बहार कब आई न रे
आज होइगइली बिटिया पराई न रे
रखलीं जतन से बड़ा रे जोगा के
बहिंया के पलना में झुलना झुलाके
अंखिया से दूर गइली दिल के दुलरुई
केकरा से दुखवा बताईं न रे
आज होइगइली बिटिया पराई न रे
प्रीतिया के रीतिया ह गजबे निराली
कहीं के कली कहीं फूल बन जाली
"सागर सनेही" नेह दूनों ओर बांटे
दूगो परिवार के मिलाई न रे
आज होइगइली बिटिया पराई न रे।
विद्या सागर "सागर सनेही
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