Thursday, February 12, 2026
छुपके छुपाइके नजरिया सेहमके लेले अइह गजरा बजरिया से
संसार के लोगों से आशा ना किया करना
संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई न हो अपना, श्री राम जपा करना।
होली गीत -: रसिया ना माने रे मोरानैनो में डारे अबीर 2
रसिया ना माने रे मोरा नैनो में डारे अबीर 2
सावरिया नैनो में डारे अबीर
बरजत रहनी , बरजियो न माने 2
खेलत यमुना के तीर 2
बिलखत गोरी लाल भयो नयना
श्याम बुझे नही पीर
सावरिया नैनो में डारे अबीर
ओरहन देत सुनयना ही मैया
सखी सब होत अधीर
यगति लागावे भाग चलन को
श्याम न अम जंजीर सावरिया
रसिया ना माने रे मोरा
नैनो में डारे अबीर 2
सावरिया नैनो में डारे अबीर
होली खेले घनश्याम, वृंदा वन में धूम माचो रे 2
होली खेले घनश्याम, वृंदा वन में धूम माचो रे 2
होली खेले घनश्याम होली खेले 2
होली खेले घनश्याम 2, वृंदा वन में धूम माचो रे 2
रंगवा अबिरिया उड़ावे ले मुरारी
उड़ावे ले मुरारी 2
लाली चुनर में भिगेली राधा प्यारी
भिगेली राधा प्यारी 2
अरे बजेला मजीरा ढोलक झाल हो 2
वृंदा वन में धूम माचो रे.......
देवघर में खेलत बाणे होली वैद्यनाथ जी
होली वैद्यनाथ जी 2
मैया पार्वती जी देत बाड़ी साथ जी
देत बाड़ी साथ जी 2
फागुन में झूमे ला चारो धाम हो
वृंदा वन में धूम माचो रे............
अवध में बनत बा खुबे पकवान जी
खुबे पकवान जी
राम जी के संग रंग खेले हनुमान जी
खेले हनुमान जी
अरे केकर केकर धरी हम नाम हो 2
वृंदा वन में धूम माचो रे............
Thursday, November 27, 2025
निगाहें बचाकर जो चलते हैं मुझसे कभी उनको मुझसे मोहब्बत हुई थी ग़ज़ल
निगाहें बचाकर जो चलते हैं मुझसे 2
कभी उनको मुझसे मोहब्बत हुई थी 2
जो मेहबूब से अजनबी हो गए हैं 2
कभी उनको मुझसे मोहब्बत हुई थी 2
सहेली का घर का बहाना बना कर
मुझे मिलाने आते थे नज़रे झुका के
चलो एक हो जाये कहते हरपल
मेरे सीने से लग कर दुनिया भुला कर
यही बात पर हां इसी बात पर ही 2
बहुत ख़ूबसूरत शरारत हुई थी
कभी उनको मुझसे मोहब्बत हुई थी 2
ये नदियों की लहरें ये पेडों की छायें
यहां होठो पर दिल के जज्बे थे आये
ये कश्मीर की वादियों के नज़ारे
भुला बैठे सब कुछ वो होकर पराए
मैं कैसे भला भूल जाऊं वो पल जब 2
मेरे प्यार के हक में कुदरत हुई थी
कभी उनको मुझसे मोहब्बत हुई थी 2
खतो को छुपा कर डरना संभलना
वो चोरी से छुपाके किताबे बदलना
यातना किसी का ये सब देखा लेना
वो नज़रे झुकाकर हाथो को मालना
कभी दोनों का राज़ खुल जाने पर भी 2
ना पूछो कैसी कयामत हुई थी
कभी उनको मुझसे मोहब्बत हुई थी 2
निगाहें बचाकर जो चलते हैं मुझसे 2
कभी उनको मुझसे मोहब्बत हुई थी 2
जो मेहबूब से अजनबी हो गए हैं 2
कभी उनको मुझसे मोहब्बत हुई थी 2
भूल जाने की कोशिश बहुत की मगर
भूल जाने की कोशिश बहुत की मगर
याद उनकी सताये मैं क्या करूँ
मेरा पीने का कोई इरादा न था 2
वो नजर से पिलाये तो मैं क्या करूँ
भूल जाने की ......
मैंने मंदिर में जाकर जलाए दिए
मैं जिसे चाहता हूँ वो मुझे मिले 2 2
जो मेरा फर्ज था मैंने पूरा किया 2
अब खुदा भूल जाय तो मैं क्या करूँ
भूल जाने की कोशिश बहुत की मगर 2
याद उनकी सताये मैं क्या करूँ
मेरा पीने का कोई इरादा न था
वो नजर से पिलाये तो मैं क्या करूँ 2
भूल जाने की .........
Tuesday, October 7, 2025
अमवा लगइहा बाबा बारी बगइचा निबिया लगइहा दुआर













