My Parents Shree Jai Prakash Tiwari Kanchan Tiwari

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Lav Tiwari and Kush Tiwari Live Performance at Chhat Mahotsav in Noida

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Me and Noida MLA Smt Vimla Batham

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Lav Tiwari and Kush Tiwari on Mahuaa Plus

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Big Brother Ravi Pratap Singh

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Me Ravinder Goel and Chiranjeet Sir

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Saturday, March 7, 2026

दुनिया के रीति नीति गजबे निराली बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली

दुनिया के रीति नीति गजबे निराली 
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली 

अपने ना आवे पिया भेजें ना नाई
अचके में होखे लागे घर से विदाई 
नइहर के लोग संगे, नाहीं ससुराली 
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली 

बांस के डोली बाटे ललका ओहरवा 
घर ही के लोग बाग बनेले कहंरवा
पिया के नगरिया चलेले हाली हाली 
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली 

दान, दहेज में भी कुछ ना दियाता 
गुन,अवगुनवा के गठरी भर जाता 
"सागर सनेही"दूनों हाथ बाटे खाली 
बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली

गीतकार सागर स्नेही जी

Tuesday, March 3, 2026

रहिया निहारे पिपरवा के छाव रेआजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे

रहिया निहारे पिपरवा के छाव रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


याद करा तुहु पहिले के बतिया

होलिया के दिनवा आ होलिया के रतिया

फिर से उहे पिरितिया जगाव रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


तोहरा बिना ई फगुनवा न सोहे

लाल गुलाबी अंगनवा न सोहे

केतनो पियाई चढ़त नइखे भाग रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


सुनिके पपीहरा और मोरवा के बोलिया

लागे करेजवा में जैसे कि गोलियां

नीक न लागे कागा के काव रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


अमवा इमिलिया के सुंदर बगिया

ग उ वा के लोगवा के मीठी मीठी बोलिया

कहे जितेंद्र वचनिया निभाव रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


रहिया निहारे पिपरवा के छाव रे

आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे


रचना गायन-:

जितेंद्र पांडेय जी 

अयोध्या उत्तर प्रदेश



Wednesday, February 25, 2026

मोहन संग खेलत राधा प्यारी बरसाने में होली

धूम मचल बा ,आज बिरज में

खेलत होरी मुरारी हो

राधा प्यारी संग में शोभत

रूप अति मनिहारी हो



मोहन संग खेलत राधा प्यारी 3

बरसाने में होली 2


केहू के भिगत पाग पगरिया 2

केहू के भिगत चोली

मोहन संग ......


केहु चटकट केहु मॅट कट आवे

केहु जोगीरा फ़ाग सुनावे

बा धूम मचल मधुबन गलियन में

जुटल गोपियन के टोली

मोहन संग ......


होली आई रे कन्हाई रंग बरसे सुना दे जरा बासुरी


राधा गोरी श्याम के रंग में हो गइल मतवाली

रंग गुलाल से चमकत चुनरी चमकत आओठ के लाली

देखी अति आनंद मगन मन भइले करत श्याम ठिठौली

बरसाने में होली 2

मोहन संग ......



Tuesday, February 24, 2026

एक प्यारा-सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव- सुदर्शन फ़कीर

एक प्यारा-सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव

छाँव में आशियाँ था, एक छोटा मकां था

छोड़ कर गाँव को, उस घनी छाँव को

शहर के हो गये हैं, भीड़ में खो गये हैं


वो नदी का किनारा, जिसपे बचपन गुज़ारा

वो लड़कपन दीवाना, रोज़ पनघट पे जाना

फिर जब आयी जवानी, बन गये हम कहानी

छोड़ कर गाँव को.....,


किनते गहरे थे रिश्ते, लोग थे या फ़रिश्ते

एक टुकड़ा ज़मी थी, अपनी जन्नत वहीं थी

हाय ये बदनसीबी, नाम जिसका गरीबी

छोड़ कर गाँव को.....,


ये तो परदेश ठहरा, देश फिर देश ठहरा

हादसों की ये बस्ती, कोई मेला न मस्ती

क्या यहाँ ज़िंदगी है, हर कोई अजनबी है

छोड़ कर गाँव को..….......





Saturday, February 14, 2026

होली गीत खेले मसाने में होरी दिगम्बर

खेले मसाने में होरी दिगम्बर

भुत पिसाच बटोरी दिगंबर

खेले मसाने में होरी,

लखि सूंदर फागुनी झता के,

मन से रंग गुलाल हटा के,

चिता बसम की झोरी

दिगंबर खेले मसाने में होरी,

नाचत गावत डमरू धारी,

छोडत सर पे गर्ल पिचकारी,

बीते प्रेत थपोरी दिगंबर

खेले मसाने में होरी,

भुत नाथ की मंगल होरी

,देख सिहाये ब्रिज की छोरी

,धन धन नाथ अगोहरी,

दिगंबर खेले मसाने में होरी,

गोप न गोपी श्याम न राधा,

ना कोई रोक न कोहनू वाधा

न साजन न गोरी,

दिगंबर खेले मसाने में होरी,



Thursday, February 12, 2026

विदाई गीत -: सुसुकि सुसिक रोंवे दुअरा पे बाबु

सुसुकि सुसिक रोंवे दुअरा पे बाबु

घरवा में रोवताड़ी माई न रे 

आज होइगइली बिटिया पराई न रे।


रहि रहि धधके करेजवा में अगिया

एक ही कोयल बिन सून भइली बगिया    

ना जाने फिर कब चहकी चिरइया,        

         जाने बहार कब आई न रे

आज होइगइली बिटिया पराई न रे


रखलीं जतन से बड़ा रे जोगा के

बहिंया के पलना में झुलना झुलाके

अंखिया से दूर गइली दिल के दुलरुई

केकरा से दुखवा बताईं न रे

आज होइगइली बिटिया पराई न रे


प्रीतिया के रीतिया ह गजबे निराली

कहीं के कली कहीं फूल बन जाली

"सागर सनेही" नेह दूनों ओर बांटे

दूगो परिवार के मिलाई न रे

आज होइगइली बिटिया पराई न रे।



काहें लायो नथुनिया उधार बालमाताना मारेला हमके सोनार बालमा

काहें लायो नथुनिया उधार बालमा
ताना मारेला हमके सोनार बालमा

नथुनी पहिनि हम गइलीं बजरिया
जइसे पड़ल मुअना के नजरिया
अंगुरी देखावे बार बार बालमा
काहें लायो नथुनिया उधार बालमा
ताना मारेला हमके सोनार बालमा

एक बात कहीं हम तोहसे सजनवा
अबला के आबरू, ह असली गहनवा
मान, मर्यादा ह सिंगार बालमा
काहें लायो नथुनिया उधार बालमा
ताना मारेला हमके सोनार बालमा

सागर सनेही संइया मान मोर बतिया
देई द उधार चाहे बेंचि द जजतिया
भलही घर में लागी केवाड़ बलमा
काहें लायो नथुनिया उधार बालमा
ताना मारेला हमके सोनार बालमा

रचना - विद्यासागर स्नेही