Friday, March 17, 2023
आओ फिर से दिया जलाएँ लिरिक्स
Thursday, March 16, 2023
आपके शहर में -- अंजुम रहबर
Wednesday, February 15, 2023
प्रभु के सिवा कही दिल ना लगाना 2
पारंपरिक होली गीत –गोरिया करके सिगार अगना में पीसे ली हरदिया 3
Tuesday, October 25, 2022
मुझे रास आ गया है अब तेरे दर पे सर झुकाना
मुझे रास आ गया है अब तेरे दर पे सर झुकाना
मुझे रास आ गया है अब तेरे दर पे सर झुकाना ३
तुझे मिल गई पुजारन २ और मुझे मिल गया ठिकाना
ओं प्रभु जी मुझे रास....................
मुझे कौन जानता था तेरी बंदगी से पहले २ २
तेरी याद ने बना दी ओ गिरधर तेरे भजन ने बना दी
मेरी जिंदगी बनाना
मुझे रास आ गया.............................
मुझे इसका गम नही है २ कि बदल गया ये ज़माना २
मेरी जिंदगी के मालिक कही तुम बदल ना जाना
मुझे रास आ..............
तेरी सावली सी सूरत, मेरे मन में बस गई है ओ गिरधर
मेरे सावरे कन्हैया २ मुझे और ना सतना २
मुझे रास आ......
मेरी आरजू यही है ,दम निकले तेरे दर पर
क्यों कि अभी सास चल रही ओ गिरधर
कही तुम चले ना जाना
मुझे रास आ..............
मुझे रस ........२
तुझे मिल.......२
चली गगन से तरनी तरंगे नमामि गंगे नमामि गंगे
चली गगन से तरनी तरंगे नमामि गंगे नमामि गंगे
चली गगन से तरनी तरंगे 2
नमामि गंगे नमामि गंगे 2
चली गगन से तरनी तरंगे नमामि गंगे नमामि गंगे 2
सगर सूतो की, ये मुक्ति दात्री 2
नमामि ................2
विष्णु प्दामुजा बर्म्हामु कमंडल
और कठवती रैदास की है 2
शिव की जटा से, है धार निकली 2
नमामि ................2
सुता हिमालय की भीष्म जननी
धरा पर आई है पाप हरने 2
जन्हु की जंघा, वितरण करती 2
बहे अभंगे नमामि गंगे
नमामि ................2
जहा भागीरथ की साधना हो
तपस्या करते महा मना हो 2
निर्मल अविरल तरल तरंगे
नमामि ................2
महा मना की ये कामना है
बहे अभंगे नमामि गंगे 2
धरा को उर्वर बनाने वाली 2
चली भागीरथ के संगे संगे 2
चली गगन से तरनी तरंगे 2
नमामि गंगे नमामि गंगे 2
चली गगन से तरनी तरंगे नमामि गंगे नमामि गंगे 2
सगर सूतो की ये मुक्ति दात्री 2
नमामि ................
Link -: Youtube Link
Tuesday, February 7, 2017
Mera Gav Jane kha kho gya hai Ghazal (मेरा गाव जाने कहाँ खो गया है)
ख़ुदग़र्ज़ और बेज़मीरो की दुनिया
यहाँ सुख मुझे दो जहाँ का मिला हैं
मेरा गाव जाने कहाँ खो गया है...
वो गाव के बच्चे वो बच्चो की टोली
वो भोली वो मासूम चाहत की बोली
वो गुल्ली वो डंडा वो लड़ना वो झगड़ना
मगर हाथ फिर दोस्ती से पकड़ना
वो मंज़र हर एक याद फिर आ रहा हैं
मेरा गाव जाने कहाँ खो गया है...............
वो चोपाल वो आल्हा रुदल के किससे
वो गीतों की गंगा वो सावन के जुले
वो लूट ता हुआ प्यार वो ज़िंदगानी हैं
मेरे लिए भूली बिसरी कहानी
छलकती हैं आँखे ये दिल रो रहा हैं
मेरा गाव जाने कहाँ खो गया है.............
ये चाँदी ये सोना ये हीरे ये मोती
थी अनमोल इन सब से एक सुखी रोटी
जो मैने गवाए ना कोई गवाए
के घर छोड़ कोई ना परदेश आए
मिलेगा ना अब वो जो पीछे लूटा हैं
मेरा गाव जाने कहाँ खो गया है...................














