Monday, April 6, 2026
दिल चुरावे ना आवेला उनकागुल खिलावे ना आवेला उनका -: मनोज भावुक
Thursday, March 19, 2026
चैती -: जाइब देवी के दुवरिय हो रामाहोत भोरहरिया
जाइब देवी के दुवरिय हो रामा
होत भोरहरिया
देवी दुवारे बाजे अनघ बधाइयां 3
अरे मईया झूले निमिया के डलिया हो रामा 2
होत भोरहरिया
जाइब देवी के दुवरिय हो रामा
बेला चमेली के, माला मगाइबे 3
सांगवा में नरियर चुनरिया हो रामा 2
होत भोरहरिया
जाइब देवी के दुवरिय हो रामा
हिय बसे मोरे मैया के सुरतिया 3
दिहे दरश मोरी मयरिया हो रामा 2
होत भोरहरिया
जाइब देवी के दुवरिय हो रामा
सुनीला अरज बाटे जबले जिनिगिया
पूजबे चरन बन पूजरिया हो रामा
होत भोरहरिया
जाइब देवी के दुवरिय हो रामा
गीतकार श्री जितेंद्र सिंह जीत
गायन प विजय कपूर जी
Tuesday, March 17, 2026
चैती - नइहर से केहु ना आईले रामाबितले फगुनवा मैथली ठाकुर
नइहर से केहु ना आईले रामा
बितले फगुनवा
बाबा मोरा रहते त नौवां के पठावते
साड़ी संग चुडिया सेनुरा हो रामा
बितले फगुनवा
नैहर से केहु ना आईले रामा........
अम्मा मोरा रहती भैया के पठवती
भौजी के कठिन करेजा
बितले फगुनवा
नइहर से केहु ना आईले रामा
Saturday, March 7, 2026
चढ़ते फागुन के हों महीना देवरा पीछे पड़ल कमीना
फगुआ में कहां अंझुरइलें हो बचवा काहें नाहीं अइलें
अचके में नेहिया सनेहिया भुलाईबचवन के छोड़ि कहां गइलू ए माई
कइसे् लें आईं तोहरा के हार धनिया अब्बो नथुनी के बाकी उधार धनिया
दुनिया के रीति नीति गजबे निराली बिना रे सजनवा गवन गोरी जाली
Tuesday, March 3, 2026
रहिया निहारे पिपरवा के छाव रेआजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
रहिया निहारे पिपरवा के छाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
याद करा तुहु पहिले के बतिया
होलिया के दिनवा आ होलिया के रतिया
फिर से उहे पिरितिया जगाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
तोहरा बिना ई फगुनवा न सोहे
लाल गुलाबी अंगनवा न सोहे
केतनो पियाई चढ़त नइखे भाग रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
सुनिके पपीहरा और मोरवा के बोलिया
लागे करेजवा में जैसे कि गोलियां
नीक न लागे कागा के काव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
अमवा इमिलिया के सुंदर बगिया
ग उ वा के लोगवा के मीठी मीठी बोलिया
कहे जितेंद्र वचनिया निभाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
रहिया निहारे पिपरवा के छाव रे
आजा परदेसिया बोलावे तोर गांव रे
रचना गायन-:
जितेंद्र पांडेय जी
अयोध्या उत्तर प्रदेश
Wednesday, February 25, 2026
मोहन संग खेलत राधा प्यारी बरसाने में होली
धूम मचल बा ,आज बिरज में
खेलत होरी मुरारी हो
राधा प्यारी संग में शोभत
रूप अति मनिहारी हो
मोहन संग खेलत राधा प्यारी 3
बरसाने में होली 2
केहू के भिगत पाग पगरिया 2
केहू के भिगत चोली
मोहन संग ......
केहु चटकट केहु मॅट कट आवे
केहु जोगीरा फ़ाग सुनावे
बा धूम मचल मधुबन गलियन में
जुटल गोपियन के टोली
मोहन संग ......
होली आई रे कन्हाई रंग बरसे सुना दे जरा बासुरी
राधा गोरी श्याम के रंग में हो गइल मतवाली
रंग गुलाल से चमकत चुनरी चमकत आओठ के लाली
देखी अति आनंद मगन मन भइले करत श्याम ठिठौली
बरसाने में होली 2
मोहन संग ......
Tuesday, February 24, 2026
एक प्यारा-सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव- सुदर्शन फ़कीर
एक प्यारा-सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव
छाँव में आशियाँ था, एक छोटा मकां था
छोड़ कर गाँव को, उस घनी छाँव को
शहर के हो गये हैं, भीड़ में खो गये हैं
वो नदी का किनारा, जिसपे बचपन गुज़ारा
वो लड़कपन दीवाना, रोज़ पनघट पे जाना
फिर जब आयी जवानी, बन गये हम कहानी
छोड़ कर गाँव को.....,
किनते गहरे थे रिश्ते, लोग थे या फ़रिश्ते
एक टुकड़ा ज़मी थी, अपनी जन्नत वहीं थी
हाय ये बदनसीबी, नाम जिसका गरीबी
छोड़ कर गाँव को.....,
ये तो परदेश ठहरा, देश फिर देश ठहरा
हादसों की ये बस्ती, कोई मेला न मस्ती
क्या यहाँ ज़िंदगी है, हर कोई अजनबी है
छोड़ कर गाँव को..….......
Saturday, February 14, 2026
होली गीत खेले मसाने में होरी दिगम्बर
खेले मसाने में होरी दिगम्बर
भुत पिसाच बटोरी दिगंबर
खेले मसाने में होरी,
लखि सूंदर फागुनी झता के,
मन से रंग गुलाल हटा के,
चिता बसम की झोरी
दिगंबर खेले मसाने में होरी,
नाचत गावत डमरू धारी,
छोडत सर पे गर्ल पिचकारी,
बीते प्रेत थपोरी दिगंबर
खेले मसाने में होरी,
भुत नाथ की मंगल होरी
,देख सिहाये ब्रिज की छोरी
,धन धन नाथ अगोहरी,
दिगंबर खेले मसाने में होरी,
गोप न गोपी श्याम न राधा,
ना कोई रोक न कोहनू वाधा
न साजन न गोरी,
दिगंबर खेले मसाने में होरी,
Thursday, February 12, 2026
विदाई गीत -: सुसुकि सुसिक रोंवे दुअरा पे बाबु
सुसुकि सुसिक रोंवे दुअरा पे बाबु
घरवा में रोवताड़ी माई न रे
आज होइगइली बिटिया पराई न रे।
रहि रहि धधके करेजवा में अगिया
एक ही कोयल बिन सून भइली बगिया
ना जाने फिर कब चहकी चिरइया,
जाने बहार कब आई न रे
आज होइगइली बिटिया पराई न रे
रखलीं जतन से बड़ा रे जोगा के
बहिंया के पलना में झुलना झुलाके
अंखिया से दूर गइली दिल के दुलरुई
केकरा से दुखवा बताईं न रे
आज होइगइली बिटिया पराई न रे
प्रीतिया के रीतिया ह गजबे निराली
कहीं के कली कहीं फूल बन जाली
"सागर सनेही" नेह दूनों ओर बांटे
दूगो परिवार के मिलाई न रे
आज होइगइली बिटिया पराई न रे।
काहें लायो नथुनिया उधार बालमाताना मारेला हमके सोनार बालमा
छुपके छुपाइके नजरिया सेहमके लेले अइह गजरा बजरिया से
संसार के लोगों से आशा ना किया करना
संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई न हो अपना, श्री राम जपा करना।
होली गीत -: रसिया ना माने रे मोरानैनो में डारे अबीर 2
रसिया ना माने रे मोरा नैनो में डारे अबीर 2
सावरिया नैनो में डारे अबीर
बरजत रहनी , बरजियो न माने 2
खेलत यमुना के तीर 2
बिलखत गोरी लाल भयो नयना
श्याम बुझे नही पीर
सावरिया नैनो में डारे अबीर
ओरहन देत सुनयना ही मैया
सखी सब होत अधीर
यगति लागावे भाग चलन को
श्याम न अम जंजीर सावरिया
रसिया ना माने रे मोरा
नैनो में डारे अबीर 2
सावरिया नैनो में डारे अबीर
होली खेले घनश्याम, वृंदा वन में धूम माचो रे 2
होली खेले घनश्याम, वृंदा वन में धूम माचो रे 2
होली खेले घनश्याम होली खेले 2
होली खेले घनश्याम 2, वृंदा वन में धूम माचो रे 2
रंगवा अबिरिया उड़ावे ले मुरारी
उड़ावे ले मुरारी 2
लाली चुनर में भिगेली राधा प्यारी
भिगेली राधा प्यारी 2
अरे बजेला मजीरा ढोलक झाल हो 2
वृंदा वन में धूम माचो रे.......
देवघर में खेलत बाणे होली वैद्यनाथ जी
होली वैद्यनाथ जी 2
मैया पार्वती जी देत बाड़ी साथ जी
देत बाड़ी साथ जी 2
फागुन में झूमे ला चारो धाम हो
वृंदा वन में धूम माचो रे............
अवध में बनत बा खुबे पकवान जी
खुबे पकवान जी
राम जी के संग रंग खेले हनुमान जी
खेले हनुमान जी
अरे केकर केकर धरी हम नाम हो 2
वृंदा वन में धूम माचो रे............













