My Parents Shree Jai Prakash Tiwari Kanchan Tiwari

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Lav Tiwari and Kush Tiwari Live Performance at Chhat Mahotsav in Noida

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Me and Noida MLA Smt Vimla Batham

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Lav Tiwari and Kush Tiwari on Mahuaa Plus

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Big Brother Ravi Pratap Singh

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Me Ravinder Goel and Chiranjeet Sir

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Wednesday, October 16, 2013

Lab pe aati duaa banke tamanna meri


लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी
ज़िन्दगी शमअ की सूरत हो ख़ुदाया मेरी

दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा हो जाये
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये

हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन की ज़ीनत
जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत

ज़िन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब
इल्म की शमअ से हो मुझको मोहब्बत या रब

हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना
दर्द-मंदों से ज़इफ़ों से मोहब्बत करना

मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस राह पे चलाना मुझको___अल्लामा इकबाल 



Musafir ke raste badalate rahe

मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे
मुक़द्दर में चलना था चलते रहे 

मेरे रास्तों में उजाला रहा 
दिये उसकी आँखों के जलते रहे 

कोई फूल सा हाथ काँधें पे था 
मेरे पाँव शोलों पे चलते रहे 

सुना है उन्हें भी हवा लग गई
हवाओं के जो रूख बदलते रहे

वह क्या है जिसे हमने ठुकरा दिया
मगर उम्र भर हाथ मलते रहे

मोहब्बत अदावत वफ़ा बेरुखी
किराये के घर थे बदलते रहे

लिपट कर चरागों से वो सो गए
जो फूल पे करवट बदलते रहे ____बशीर बद्र




Wednesday, October 9, 2013

Zindgi Jab Bhi Teri Bazm Mein Lati Hain

Zindgi Jab Bhi Teri Bazm Mein Lati Hain....
जिन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती हैं हमे........

जिन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती हैं हमे
ये ज़मीं चाँद से बेहतर नजर आती हैं हमे

सुर्ख फूलों से महक उठती हैं दिल की राहें
दिन ढले यूँ तेरी आवाज बुलाती हैं हमे

याद तेरी कभी दस्तक, कभी सरगोशी से
रात के पिछले पहर रोज जगाती हैं हमे

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यों हैं
अब तो हर वक़्त यही बात सताती हैं हमे

गीतकार : शहरयार,
गायक : तलत अजीज
 संगीतकार : खय्याम

चित्रपट : उमराव जान –(1981)


Monday, October 7, 2013

Ranjish hi sahi, dil hi dukhanay kay liye aa by Mehdi Hassan


रंजिश ही सही, दिल को दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझको मनाने के लिए आ

पहले से मरासिम न सही, फिर भी कभी तो
रस्मों-रहे दुनिया ही निभाने के लिए आ

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है, तो ज़माने के लिए आ

इक उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिरिया से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझको रुलाने के लिए आ

अब तक दिल-ए-ख़ुशफ़हम को तुझ से हैं उम्मीदें
ये आखिरी शमएँ भी बुझाने के लिए आ____अहमद फ़राज़

गायक __मेहँदी हसन

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कुछ बातें अहमद फ़राज़ साहब के बारे में ___जन्म: 14 जनवरी 1931
निधन:__ 25 अगस्त 2008
उपनाम__ फ़राज़
जन्म स्थान____ नौशेरा, पाकिस्तान
कुछ प्रमुख
कृतियाँ____ ख़ानाबदोश,, ये मेरी ग़ज़लें वे मेरी नज़्में, ज़िंदगी ! ऐ ज़िंदगी !, दर्द आशोब
विविध___ अहमद फ़राज़ का मूल नाम सैयद अहमद शाह है। आप आधुनिक युग के उर्दू के सबसे उम्दा शायरों में गिने जाते हैं।

shayad main zindagi ki sahar le ke aa gaya

शायद मैं ज़िन्दगी की सहर ले के आ गया 
क़ातिल को आज अपने ही घर ले के आ गया 

ता-उम्र ढूंढता रहा मंज़िल मैं इश्क़ की 
अंजाम ये कि गर्दे-सफ़र ले के आ गया 

नश्तर है मेरे हाथ में , कांधों पे मैकदा
लो मैं इलाजे-दर्दे-जिगर ले के आ गया

"फ़ाकिर" सनमकदे में न आता मैं लौटकर
इक ज़ख्म भर गया था , इधर ले के आ गया ____सुदर्शन "फ़ाकिर"

सनमकदे __मंदिर
गर्दे सफ़र ___यात्रा की धूल




कुछ बातें सुदर्सन साहब के बारे में ___जन्म: 1935
निधन: __१८ फरवरी ‘०८
उपनाम__ फ़ाकिर
जन्म स्थान___ जालन्धर
कुछ प्रमुख
कृतियाँ____ पत्थर के ख़ुदा / सुदर्शन फ़ाकिर

Chandi jaisa rang hai tera sone jaise baal by Pankaj Udhas

चांदी जैसा रंग है तेरा , सोने जैसे बाल
एक तू ही धनवान है गोरी , बाकी सब कंगाल

जिस रस्ते से तू गुजरे , वो फूलों से भर जाये
तेरे पैर की कोमल आहट सोते भाग जगाये
जो पत्थर छु ले गोरी तू वो हीरा बन जाये
तू जिसको मिल जाये वो हो जाये मालामाल
एक तू ही धनवान है गोरी , बाकी सब कंगाल

जो बे -रंग हो उस पर क्या क्या रंग जमाते लोग
तू नादाँ न जाने कैसे रूप चुराते लोग
नज़रें भर भर देखें तुझको आते जाते लोग
छैल छबीली रानी थोडा घूंघट और निकाल
एक तू ही धनवान है गोरी , बाकी सब कंगाल

धनक घटा कलियाँ और तारे सब हैं तेरे रूप
धनक घटा कलियाँ और तारे सब हैं तेरा रूप
ग़ज़लें हों या गीत हों मेरे सब में तेरा रूप
यूँही चमकती रहे हमेशा तेरे हुस्न की धुप
तुझे नज़र न लगे किसी की जिए हजारों साल
एक तू ही धनवान है गोरी , बाकी सब कंगाल___अनजान

गायक __पंकज उधास





Sunday, October 6, 2013

Mulk Teri Barbadi Ke Aasar Nazar Aate Hai

मुल्क तेरी बर्बादी के आसार नज़र आते है ,
चोरों के संग पहरेदार नज़र आते है

ये अंधेरा कैसे मिटे , तू ही बता ऐ आसमाँ ,
रोशनी के दुश्मन चौकीदार नज़र आते है

हर गली में, हर सड़क पे ,मौन पड़ी है ज़िंदगी ,
हर जगह मरघट से हालात नज़र आते है

सुनता है आज कौन द्रौपदी की चीख़ को ,
हर जगह दुस्सासन सिपहसालार नज़र आते है

सत्ता से समझौता करके बिक गयी है लेखनी ,
ख़बरों को सिर्फ अब बाज़ार नज़र आते है

सच का साथ देना भी बन गया है जुर्म अब ,
सच्चे ही आज गुनाहगार नज़र आते है

मुल्क की हिफाज़त सौंपी है जिनके हाथों मे ,
वे ही हुकुमशाह आज गद्दार नज़र आते है

खंड खंड मे खंडित भारत रो रहा है ज़ोरों से ,
हर जाति , हर धर्म के, ठेकेदार नज़र आते है ____अनजान